Thursday, November 20, 2025

हरजस पद राग मंगल (१९) में १८ का अरथ राजा सो मन, राण्यां सुमति-कुमति दोय। कुमति रा पुत्र प्रथम तो लोभ, डाव, संशय, मत्सर, दगो, धेख, दावो, क्रोध, अहंकार, अविश्वास, मद, मान, पाखण्ड ओ तेरा बेटा। बेटी तरसना, निंदा, घात, ममता, दुरमति ये पांचु बेटी। सुमति रा पुत्र प्रथम तो ज्ञान, विचार, विवेक, शील, सांच, संतोष, सत, तप, जप, त्याग, वैराग्य, भाव, भजन, विश्वास ओ तेरा बेटा। बेटी धीरज, क्षमा, संयम, दया, भक्ति, ओ पांचु बेटी, जिण राजा के कुमति ने सुहाग दियो सो नरका में जावसी, तिण राजा ने सुमति ने सुहाग दियो सो मोक्ष मुक्ति रो अधिकारी होवसी। संत सुखरामजी कहे मैं का कहूं, वेद भागवत कहती है।"

Mhaare paavna paramguru aaj म्हारे पावणा परमगुरु आज_ हरजस पद राग बधावा (१)

 म्हारे पावणा परमगुरु आज, संया आवो ओ।  म्हारे आया ओ हरि का जन आज, संया आवो ओ ॥ टेर ॥  आवो ओ गावो संया, आणंद बधावा।  म्हारे आंगणिये ओ साधां र...