Sunday, May 31, 2026

Mhaare paavna paramguru aaj म्हारे पावणा परमगुरु आज_ हरजस पद राग बधावा (१)



 म्हारे पावणा परमगुरु आज, संया आवो ओ।
 म्हारे आया ओ हरि का जन आज, संया आवो ओ ॥ टेर ॥
 आवो ओ गावो संया, आणंद बधावा। 
म्हारे आंगणिये ओ साधां रो समाज, संया आवो ओ ॥ १ ॥
 कथा ओ प्रसंग हिलमिल, हरिगुण गास्यां । 
म्हारे मेहेर करी है महाराज, संया आवो भे ॥ २ ॥
 किणीयक सुकरत संया, सतगुरुजी मिलिया। 
कोई किणी ओ मानव तन साज, संया आवो ओ ॥ ३ ॥ 
 ओ मानव तन संया, ब्रह्मादिक बंछे।
 कोई राम शिंवर किज्यो काज, संया आवो ओ ॥ ४ ॥ 
 सोना रो सूरज म्हारे, इण पुल ऊगो।
 म्हारे घर बैठा गंगा आई आज, संया आवो ओ ॥ ५ ॥ 
 लख चौरासी संया, दुखडा री फांसी। 
कोई हुवो ओ बहोत अकाज, संया आवो जे ॥ ६ ॥ 
 इण भवसागर म्हारा, सतगुरु जी तारे। 
कोई आपरा बिडद की है लाज, संया आवो भे ॥ ७ ॥ 
 सुखदेव सुख में म्हारो, मनवो जी झूले। 
म्हारे साथ सदाई शिरताज, संया आवो ॥ ८ ॥

 संतों का आगमन — आत्मा का उत्सव
 महाराज सब सहेलियों से फरमाते हैं: "आज मेरे सतगुरु परमगुरु मेरे घर पधारे हैं। मेरे परमात्मा के जन मेरे द्वार आए हैं — तुम सब आओ, आकर आनंद और बधावा गाओ।आज मेरे घर संतों का समाज आया है — तुम सब आओ। संतों के पधारने से कथा-प्रसंग होगा, हिलमिलकर परमात्मा का गुणानुवाद गाएँगे।मेरे ऊपर पूर्ण कृपा करके मेरे घर पधारे हैं — तुम सब आओ।मनुष्य जन्म बड़े पुण्य के फल से मिलता है। इस मनुष्य जीवन की इच्छा ब्रह्मा, विष्णु, महादेव भी करते हैं। रामजी की भक्ति करके अपना कार्य, अर्थात परमात्मा की प्राप्ति, कर लो।सतगुरु कृपा करके मेरे घर पधारे हैं — यही सोने का सूरज इस फूल के बाग़ में उगा है, और यही घर बैठे गंगा आने जैसा है। तुम सब आओ।चौरासी लाख योनियों का दुख भोगना ही दुखड़ा री फांसी है — बहुत भारी अकाज (अंधकार/कष्ट) हो गया है — तुम सब आओ।इस भवसागर, अर्थात चौरासी से मेरे सतगुरु ही तारेंगे — वे अपनी बिडद की लाज (मर्यादा/प्रतिज्ञा) रखकर चौरासी का दुख मिटाएँगे — तुम सब आओ।महाराज फरमाते हैं: "संतों की कृपा से मेरा मन चौबीसों घंटे सुख और आनंद का अनुभव करता है — यही मन का झूलना है। संत मेरे सदैव शिर के ताज हैं।"

जीवात्मा ने अपना पहला कर्म (गलती) कहाँ किया था?सबसे पहली बार उस 'आदि पुरुष' (परमात्मा/ब्रह्म) से बिछड़ी थी, तब तो संसार था ही नहीं

हरजस पद राग मिश्रीत (५)   संत सुखराम जी महाराज का यह हरजस अत्यंत तार्किक, दार्शनिक और सुरति-शब्द योग के सबसे बड़े रहस्य का उद्घाटन करने व...