आन धरम दिन चार, उपज खपजाय है। ब्रह्म भगत अर भेद, अटल जग मांय है।। १ ।।
अंत समय लग जोय, भगती में आवसी। जांको यो गुण होय, नरक नहीं जावसी ।। २ ।।
अंत समय में भूप, महा हर गावियो। गयो नरक विष छूट, परमपद पावियो ।। ३ ।।
सात दिवस रट राम, परिक्षित हालियो। रिख को मेटयो श्राप, मुगत में मालियो ।। ४ ।।
दलिपत मोहरत दोय, रटयो है राम ने। गयो है जलम वो जीत, सिधायो धाम ने ।। ५ ।।
अजामेल अंतकाल के जमदूता मारियो। कह सुखदेव हरि नांव, लेत सम तारियो ।। ६ ।।
Harjas Pad – Raag Mangal
Aan dharm din chaar, upaj khapjaay hai.
Brahm bhagat ar bhed, atal jag maay hai. || 1 ||
Ant samay lag joy, bhagti mein aavsi.
Jaan ko yo gun hoy, narak nahin jaavsi. || 2 ||
Ant samay mein bhoop, maha har gaaviyo.
Gayo narak vish chhoot, parampad paaviyo. || 3 ||
Saat divas rat Ram, parikshit haaliyo.
Rikh ko metyo shraap, mugat mein maaliyo. || 4 ||
Dalipat moharat doy, ratyo hai Ram ne.
Gayo hai jalam wo jeet, sidhaayo dhaam ne. || 5 ||
Ajamel antkaal ke jamdoota maariyo.
Kah Sukhdev Hari naav, let sam taariyo. || 6 ||
माया का धर्म थोड़े समय का है, उपजता है और खपता भी है। ब्रह्म प्राप्ति का साधन हमेशा निश्चल रहता है। अंत समय में भी यदि ब्रह्म की भक्ति करने में लगेंगे तो उसका यह फल होगा कि नरक में नहीं जाएंगे। राजा खटवांग ने अंत समय में भक्ति धारण की, जिससे नरकों के दुख से छुटकर परम पद की प्राप्ति की। राजा परीक्षित ने सात दिन राम जी की भक्ति की, जिससे ऋषि का श्राप मिटकर मुक्ति को प्राप्त हुआ। दो घड़ी राम जी का भजन कर मनुष्य जन्म को जीत कर राजा दिलीप ने धाम की प्राप्ति की। महाराज फरमाते हैं कि अजामिल को अंत समय में यमराज के दूत लेने आए पर उसने पुत्र राम नारायण को पुकारा, जिससे उसका भी उद्धार हो गया।