धिन धिन सो हंस भाग, बिसे सब पालिया। मरतलोक में आय, कारज कर चालिया ।। १ ।।
देवलोक के मांय, आनंद सो होत है। आज विशन को लोक, बाट सो जोत है।। २ ।।
धिन धिन हो पुल आज, हंस सो आवसी। मरतलोक हर गाय, बोहोत सुख पावसी ।। ३ ।।
यूं हर जोवे बाट, ज्ञान सुण जोइये। जे चावो सुख चेन, मती कोई रोइड्ये ।। ४ ।।
रोयां जम का दूत, दोडयां आवसी। धरमराय के द्वार, घेर ले जावसी ।।५।।
मानो वचन हमार, सही कर लीजियो। छाड जगत की रीत, भगत राह कीजियो ।। ६ ।।
जुग चालां सुं जोय, हंसो दुख पावसी। कह सुखदेव सब साध, गुन्हो शिर आवसी ।। ७ ।।
Harjas Pad Raag Mangal (7)
Dhin dhin so hans bhaag, bise sab paaliya.
Martalok mein aay, kaaraj kar chaaliya. || 1 ||
Devalok ke maay, aanand so hot hai.
Aaj Vishan ko lok, baat so jot hai. || 2 ||**
Dhin dhin ho pul aaj, hans so aavsi.
Martalok har gaay, bohot sukh paavsi. || 3 ||**
Yoon har jove baat, gyaan sun joieye.
Je chaavo sukh chen, mati koi roidye. || 4 ||**
Roya jam ka doot, doday aavsi.
Dharmaray ke dwaar, gher le jaavsi. || 5 ||**
Mano vachan hamaar, sahi kar lijiye.
Chhaad jagat ki reet, bhagat raah kijiye. || 6 ||**
Jug chaalaan soon joy, hanso dukh paavsi.
Kah Sukhdev sab saadh, gunho shir aavsi. || 7 ||**
उन हंसों को धन्य-धन्य है जो विषयों को छोड़कर मृत्युलोक में आकर राम जी की भक्ति कर गए हैं। उनसे देवताओं के लोक में देव खुशी होते हैं। विष्णु के लोक में भी उनकी राह देखते हैं। आज के पुल को धन्य है जो मोक्ष में जाने वाले हंस आएंगे। मृत्युलोक में राम जी की भक्ति करके बहुत सुखों की प्राप्ति करके आएंगे। इस प्रकार परमात्मा भी उनकी राह देखते हैं। ज्ञान से इस बात को देख लो। अगर सुख-शांति चाहते हो तो कोई मत रोवो। रोने पर यमराज के दूत दौड़कर आकर के यमराज के यहां ले जाएंगे। हमारे वचनों को मानो और सत्य समझो कि संसार की वृत्तियों से अलग होकर प्रेम से भक्ति धारण करो। संसार की वृत्तियों में चलने से हंस को बड़ा दुख होगा। महाराज फरमाते हैं कि साधु होकर भी संसार की वृत्तियों में चलने पर उनकी निंदा होगी।