सुच धरणी अप सुच, तेज ही सुच है। ज्यां भेटियां मल मेल, सबे ही मुच है ।। १ ।।
सुच पवन आकाश, सुच करतार है। हर हर कर दो दाग, दोष सब टार है।। २ ।।
धरणी सुं अस्तुत, बिनती कीजिये। रथी चुणां शीर तोय, दोष मति दीजिये ।। ३ ।।
देव दुग छल छिद्र, दूर सब जावज्यो। कह सुखदेव तुम राम, कृपा कर आवज्यो ।। ४ ।।
Harjas Pad Raag Mangal (6)
Such dharanee ap such, tej hi such hai.
Jyaan bhetiyan mal mel, sabe hi much hai. || 1 ||
Such pavan aakaash, such Kartaar hai.
Har har kar do daag, dosh sab taar hai. || 2 ||**
Dharanee soon astut, binti kijiye.
Rathi chunan sheer toy, dosh mati dijiye. || 3 ||**
Dev dug chal chidra, door sab jaavjyo.
Kah Sukhdev tum Ram, kripa kar aavjyo. || 4 ||**
धरती, पानी, तेज़ सब पवित्र हैं। इनमें मिलने पर सब मल-मेल मिट जाता है। हवा, आकाश और परमात्मा भी पवित्र हैं। परमात्मा का नाम ले लेकर दाग धोने से सब दोष मिट जाते हैं। अर्थी चुनकर पृथ्वी माता से प्रार्थना करो कि हमें इसका दोष मत दीजिए। देव, राक्षस, छल-छिद्र सब दूर हो जाएं। महाराज फरमाते हैं कि हे राम, आप मेहर करके पधारिए।