Sunday, August 31, 2025

Sunjyo sab nar naar bhajan so kijiye सुणज्यो सब नर नार भजन सो कीजिये_ हरजस पद राग मंगल (५)

 

 सुणज्यो सब नर नार भजन सो कीजिये। हंस चल्यो घर आद बोलावो दीजिये ।। १ ।। 

कर बैकुण्ठी खूब महि पदराइये। परदिखणा प्रणाम हरि जस गाइये ।। २ ।। 

अगर चन्दन कूं ल्याय तिलक सो कीजिये। केशर आंण गुलाल छांटणा दीजिये ।। ३ ।।

 फरयां चिरांका जोय बाजा सो बजावणा। कर नाटक बोहो भांत मंजल लग जांवणा ।। ४ ।। 

यां बांता करतार बोहोत सुख पावसी। हंसा के गुण होय तुमें जस आवसी ।। ५ ।। 

धिन नर नारी गांव रोज ज्यां बिसरे। धिन नर जांके हो लार बैकुण्ठी निसरे ।। ६ ।।

 जुग में बाता दोय अशुभ शुभ जाणिये। कह सुखदेव आ चाल असल सत ठाणिये ।। ७ ।। 

Harjas Pad Raag Mangal (5)

Sunjyo sab nar naar bhajan so kijiye.
Hans chalyo ghar aad bolavo dijiye. || 1 ||

Kar Baikunthi khoob mahi padraaiye.
Pardikhna pranam Hari jas gaaiye. || 2 ||**

Agar chandan koon lyaay tilak so kijiye.
Kesar aan gulaal chhaantna dijiye. || 3 ||**

Farya chiraanka joy baaja so bajavna.
Kar naatak boho bhaant manjhal lag jaavna. || 4 ||**

Yaan baanta Kartaar bohot sukh paavsi.
Hansa ke gun hoy tumen jas aavsi. || 5 ||**

Dhin nar naari gaanv roz jyaan bisre.
Dhin nar janke ho laar Baikunthi nisre. || 6 ||**

Jug mein baata doy ashubh shubh jaaniye.
Kah Sukhdev aa chaal asal sat thaaniye. || 7 ||**

सब ही स्त्री-पुरुष सुनो, भजन करो। हंस शरीर छोड़कर परम पद में जाता है, उसे खुशी के साथ ले जाओ। बैकुण्ठी बनाकर उसमें विराजमान करो, उनकी प्रदक्षिणा व प्रणाम करके परमात्मा के गुणानुवाद गाओ, चंदन का तिलक करके गुलाल के छिड़काव करो, फेरी लगाओ, चिरांका जोवो, बाजा बजाओ। इस प्रकार ठाट-बाट से शमशान भूमि तक ले जाओ। इन बातों से परमात्मा बहुत प्रसन्न होंगे, हंस का भला होगा और तुम्हारा यश होगा। उन स्त्री-पुरुष गांववालों को धिन है जो रोते नहीं हैं। वे मनुष्य भी धिन के योग्य हैं जिनके पीछे बैकुण्ठी निकलती है। जगत में शुभ-अशुभ ये दो बातें हैं। महाराज फरमाते हैं कि यह रीति सही और अच्छी है, इसको सत समझो।


Mhaare paavna paramguru aaj म्हारे पावणा परमगुरु आज_ हरजस पद राग बधावा (१)

 म्हारे पावणा परमगुरु आज, संया आवो ओ।  म्हारे आया ओ हरि का जन आज, संया आवो ओ ॥ टेर ॥  आवो ओ गावो संया, आणंद बधावा।  म्हारे आंगणिये ओ साधां र...