सुणज्यो सब नर नार भजन सो कीजिये। हंस चल्यो घर आद बोलावो दीजिये ।। १ ।।
कर बैकुण्ठी खूब महि पदराइये। परदिखणा प्रणाम हरि जस गाइये ।। २ ।।
अगर चन्दन कूं ल्याय तिलक सो कीजिये। केशर आंण गुलाल छांटणा दीजिये ।। ३ ।।
फरयां चिरांका जोय बाजा सो बजावणा। कर नाटक बोहो भांत मंजल लग जांवणा ।। ४ ।।
यां बांता करतार बोहोत सुख पावसी। हंसा के गुण होय तुमें जस आवसी ।। ५ ।।
धिन नर नारी गांव रोज ज्यां बिसरे। धिन नर जांके हो लार बैकुण्ठी निसरे ।। ६ ।।
जुग में बाता दोय अशुभ शुभ जाणिये। कह सुखदेव आ चाल असल सत ठाणिये ।। ७ ।।
Harjas Pad Raag Mangal (5)
Sunjyo sab nar naar bhajan so kijiye.
Hans chalyo ghar aad bolavo dijiye. || 1 ||
Kar Baikunthi khoob mahi padraaiye.
Pardikhna pranam Hari jas gaaiye. || 2 ||**
Agar chandan koon lyaay tilak so kijiye.
Kesar aan gulaal chhaantna dijiye. || 3 ||**
Farya chiraanka joy baaja so bajavna.
Kar naatak boho bhaant manjhal lag jaavna. || 4 ||**
Yaan baanta Kartaar bohot sukh paavsi.
Hansa ke gun hoy tumen jas aavsi. || 5 ||**
Dhin nar naari gaanv roz jyaan bisre.
Dhin nar janke ho laar Baikunthi nisre. || 6 ||**
Jug mein baata doy ashubh shubh jaaniye.
Kah Sukhdev aa chaal asal sat thaaniye. || 7 ||**
सब ही स्त्री-पुरुष सुनो, भजन करो। हंस शरीर छोड़कर परम पद में जाता है, उसे खुशी के साथ ले जाओ। बैकुण्ठी बनाकर उसमें विराजमान करो, उनकी प्रदक्षिणा व प्रणाम करके परमात्मा के गुणानुवाद गाओ, चंदन का तिलक करके गुलाल के छिड़काव करो, फेरी लगाओ, चिरांका जोवो, बाजा बजाओ। इस प्रकार ठाट-बाट से शमशान भूमि तक ले जाओ। इन बातों से परमात्मा बहुत प्रसन्न होंगे, हंस का भला होगा और तुम्हारा यश होगा। उन स्त्री-पुरुष गांववालों को धिन है जो रोते नहीं हैं। वे मनुष्य भी धिन के योग्य हैं जिनके पीछे बैकुण्ठी निकलती है। जगत में शुभ-अशुभ ये दो बातें हैं। महाराज फरमाते हैं कि यह रीति सही और अच्छी है, इसको सत समझो।