Sunday, August 31, 2025

Dhar Maanav Avtaar धर मानव अवतार न गायो राम कूं_ हरजस पद राग मंगल (४)

 

धर मानव अवतार न गायो राम कूं। गया वे जमारो हार चल्या जम धाम कुं ।। १ ।। 

अन्त समय के लेण भजन नर करत है। सुख संपत सब छाड ध्यान हर धरत है।। २ ।।

 सुणज्यो सब नर नार समो अन्त आवसी। शिवरण बिन जमदूत पकड ले जावसी ।। ३ ।।

 छाड जगत की रीत को भगत संभाइये। जम जालम फिर जाय परमपद पाइये ।। ४ ।। 

चले कोई जन धाम इसी विध कीजिये। कर बैकुंठी उच्छाव बोलावो दीजिये ।। ५ ।। 

कोट कोट फल होय बैकुण्ठी काडिया। हंस दुवा दे जाय अशुभ राह छाडिया ।। ६ ।।

जे कोई रोवे नांय आंसू नहीं निसरे। कह सुखदेव वो जीव बिसे दुख बिसरे ।। ७ ।। 

Dhar Maanav Avtaar – Harjas Pad Raag Mangal

Dhar maanav avtaar na gaayo Ram koon.
Gayo ve jamaaro haar chalya jam dhaam koon. || 1 ||

Ant samay ke len bhajan nar kart hai.
Sukh sampat sab chhaad dhyaan har dhart hai. || 2 ||**

Sunjyo sab nar naar samo ant aavsi.
Shivran bin jamdoot pakad le jaavsi. || 3 ||**

Chhaad jagat ki reet ko bhagat sambhaaiye.
Jam jaalam fir jaay parampad paaiye. || 4 ||**

Chale koyi jan dhaam isi vidh kijiye.
Kar Baikunthi uchchhaav bolavo dijiye. || 5 ||**

Kot kot phal hoy Baikunthi kaadiya.
Hans duva de jaay ashubh raah chhaadiya. || 6 ||**

Je koyi rove naay aansoo nahin nisre.
Kah Sukhdev wo jeev bise dukh bisre. || 7 ||**

मनुष्य जन्म पाकर जिन्होंने रामजी की भक्ति नहीं की, वे मनुष्य जन्म व्यर्थ खोकर नरकों में गये। अन्त समय में वृत्ति भगवत में बनी रहने के लिए भजन करते हैं। सुख-संपत्ति का मोह छोड़कर परमात्मा का ध्यान करते हैं। सब स्त्री-पुरुष सुनो, अन्त समय में बिना भजन किए यम के दूत पकड़ ले जाएंगे। संसार की रीति को छोड़कर भक्ति धारण करो, जिससे जन्म-मरण मिटकर परम पद की प्राप्ति हो जाए। कोई इंसान धाम को चले तो ऐसी विधि करो, बैकुण्ठी का उछब करके ले जाओ। बैकुण्ठी निकालने पर करोड़ों फलों की प्राप्ति होगी। अशुभ रास्ता छोड़ने से हंस आशीष दे जाता है। जो कोई रोता नहीं और आंसू नहीं निकालता है, तो महाराज फरमाते हैं कि वह जीव विषयों का दुख भूल जाता है।


Mhaare paavna paramguru aaj म्हारे पावणा परमगुरु आज_ हरजस पद राग बधावा (१)

 म्हारे पावणा परमगुरु आज, संया आवो ओ।  म्हारे आया ओ हरि का जन आज, संया आवो ओ ॥ टेर ॥  आवो ओ गावो संया, आणंद बधावा।  म्हारे आंगणिये ओ साधां र...