Saturday, August 30, 2025

Jug badai chhaad naav nij gaavsi जुग बडाई छाड नांव निज गावसी_ हरजस पद राग मंगल (२)

 

जुग बडाई छाड नांव निज गावसी। जाके आदिस पेल सुणो सब आवसी ।। १ ।। 

अणभै होय उचार अज्ञया बोहो लेत है। यां राखे ये घेर चलण नहीं देत है।। २ ।। 

शिष्य चेला सब छाड नांव सुं लागसी। ज्यां देवत चल आय सिद्ध बोहो जागसी ।। ३ ।।

 सिद्ध सुं रिजे नांय देवा कूं फेरसी। तां दिन ब्रह्मा महेश विष्णु सो घेरसी ।। ४ ।।

 या तीना की रीजमान छिट काइये। तां दिन कह सुखराम ब्रह्म लग जाइये ।। ५ ।। 

Harjas Pad Raag Mangal (2)

Jug badai chhaad naav nij gaavsi. Jaake aadis pel suno sab aavsi. || 1 ||

Anbhai hoy uchaar agnyaa boho let hai.
Yaan raakhe ye gher chalan nahin det hai. || 2 ||

Shishya chela sab chhaad naav soon laagsi.
Jyaan devat chal aay siddh boho jaagsi. || 3 ||

Siddh soon rize naay deva koon fersi.
Taan din Brahma Mahesh Vishnu so ghersi. || 4 ||

Ya teena ki reejmaan chhit kaaiye.
Taan din kah Sukhram Brahm lag jaaiye. || 5 ||

जो अणभै ज्ञान के अनुसार जगत की बड़ाई छोड़कर निज नाम की भक्ति करते हैं, तो उन्हें तीनों गुण, धर्मराज की फौज, रिद्धि-सिद्धि घेर कर उनका रास्ता रोक लेती हैं। भक्ति करने वाला न किसी का शिष्य या चेला बनता है, न ही बनाता है। राम नाम की रटना करता है, तो देवता ऐसे भक्त के हाजिर रहते हैं, एवं सिद्धियाँ जागृत हो जाती हैं। तो वह सिद्धियों से फूले नहीं, एवं देवताओं से किसी प्रकार की चाहना नहीं करे। जब भक्ति करने वाली आत्मा त्रिकुटी यानी गोलोक धाम, तीनों देवों के स्थान पर आती है, तब तीनों देवता उनका सम्मान करते हैं कि आप यहां पर रुकें, हमारा आतिथ्य स्वीकार करें, लेकिन पहुंचे हुए संत इनकी रजामंद नहीं होते, क्योंकि उन्हें केवल परम पद में जाना है। 


Mhaare paavna paramguru aaj म्हारे पावणा परमगुरु आज_ हरजस पद राग बधावा (१)

 म्हारे पावणा परमगुरु आज, संया आवो ओ।  म्हारे आया ओ हरि का जन आज, संया आवो ओ ॥ टेर ॥  आवो ओ गावो संया, आणंद बधावा।  म्हारे आंगणिये ओ साधां र...