Tuesday, September 23, 2025

Brahm Stuti_ब्रह्म स्तुति



नमों नांव गुण पार, पार तेरा कुण पावे ।

 नमों गत अवगत नमों तु भेव बतावे ॥ १ ॥

नमों पाप खोगाल, नमों परमेश्वर प्यारा।

 नमों नांव बिन छेह, नमों बिडद सिर भारा ॥ २ ॥ 

 नमों नेट श्रीराम, नमों नारायण नीका ।

नमों करण करतार, नमों केवल हर टीका ॥ ३ ॥

नमों नांव निसाण, नमों सब तुज सरावे।

नमों निरंजन राय, नमों संतन मन भावे ॥ ४ ॥

नमों आप सेह जीत, नमों तु ही तु होई। 

नमों धरण आकाश, तुम बिन और न कोई ॥ ५ ॥ 

नमों नांव निरधार,नमों  टेके बिन करता  ।

नमों पुरातम पीव, नमों केवल मन हरता ॥ ६ ॥

नमों हरि हर राम, नमों संतन सुख दाई  ।

नमों जहां तहां तुज, शकल घट रहया समाई ॥ ७ ॥ 

नमो बीधुसन भरम, नमों सब करम मिटावण ।

नमो तात प्रतिपाल, नमों भों मांय लंघावण ॥ ८ ॥

नमों आस असमान, नमों हर अंतरजामी। 

नमों संतन सब शीष, नमों केवल हर स्वामी ॥ ९ ॥

 नमों मेहर जगदीश, नमों हर गरभ अहारी ।

नमों पलक दरयाव, नमों सब मांड पसारी ॥ १० ॥

नमों निरंतर मांय, नमों सायब हर सांचा ।

नमों अलख हर आप, नमों त्यारण हर बाचा ॥११॥

नमों रूप अण रूप, रूप तेरा सब होई ।

नमों ध्यान निज धाम, नमों केवल हर सोई ॥ १२॥  

नमों नमों गुरूदेव, नमों मुगती गत दाता । 

नमों ब्रह्म निरधार, नमों सुख शरण विधाता ॥ १३ ॥  

नमों निरंजन राय, नमों आकाश बिन पाणी । 

नमों देव शिर देव, नमों जुग जुग जुगाणी ॥१४॥  

नमों राम पर पीर, नमों रमता सब मांही । 

नमों आप करतार, नमों केवल हर कवाही॥ १५॥  

नमों निरंजण देव, नमों पूरण अविनाशी । 

नमों ब्रह्म परिब्रह्म, नमों हरि घट घट वासी ॥१६॥  

नमों अचल अद्वेत, भेद जन बिरला पावे । 

नमों असंगी संग, रंग बिन रंग दिखावे ॥ १७ ॥  

दोहा

सुखरामदास वन्दन करे, नमों ब्रह्म भगवान । 

आत्म तत अरूप है, पूरण पद निरवाण ॥ १८ ॥  

नमों नमों परब्रह्म, अचल निज नांव अरूपं ।

 नमों अखै अद्वैत, परम गुरू सत सरूपं ॥१९॥  

नमो ब्रह्म अनाद, आद अगाद गुसांई। 

तीन लोक चहुं चख, शकल व्यापक हर सांई ॥ २० ॥  

नमो नमों सब मांय, नमों सब ही सु न्यारा ।  

नमों प्रगट नहीं गुप्त,छीपत नहीं लिपत लिंगारा ॥२१॥  

नमो नमों निरबाण पद, निजानंद निश्चल पदा ।  

सुखरामदास वंदन करे, चरणकंवल बंदु सदा ॥ २२ ॥  


श्लोक:  

धर्मो न कर्मो ग्यानों न तांई, नहीं बाप मैया बैना न भाई । 

दिष्टो न मुष्टो नामो न ठांणा, कहे इम सुखम ब्रह्म बखाणा ॥ २३ ॥ 

 जातो न पांतो न्यातो न मेला, नहीं धूप रूपंग संगी न अकेला। 

आबो न जाबो केबो न कांई, कहे इम सुखम ब्रह्म गुसांई ॥ २४ ॥

छोटो न मोटो फोरो न भारी, नहीं कहण कीमत थाह बिचारी। 

जन्मयो न जननी बंधु न मेला, कहे इम सुखम ब्रह्म अकेला ॥ २५ ॥

घी साव पुष्पंग जल मीन पंथो, उडे बिंहग भंवरा कहा गेल संतो। 

सेझांस सुखम सो जीव जाणे, यूं ब्रह्म सुखम कोई संत पिछाणे ॥ २६ ॥ 



Mhaare paavna paramguru aaj म्हारे पावणा परमगुरु आज_ हरजस पद राग बधावा (१)

 म्हारे पावणा परमगुरु आज, संया आवो ओ।  म्हारे आया ओ हरि का जन आज, संया आवो ओ ॥ टेर ॥  आवो ओ गावो संया, आणंद बधावा।  म्हारे आंगणिये ओ साधां र...