Jyan param pad tat diya ho
हो ज्यां परम पद तत दिया हो_ हरजस पद राग धुन प्रभाती १
हो ज्यां परम पद तत दिया हो, मेरा भरम बिधुसण किया हो । टेर ॥
वे जन को कब आसी हो, वे सत लोक का वासी हो ॥ १ ॥
निर्भय मोकूं किया हो, परम मोख पद दिया हो ॥ २ ॥
धिन धिन वा पुल कुवासी हो, ज्यां दिन सतगुरु आसी हो ॥ ३ ॥
चरणा शीश निवासूं हो, सनमूख दरशन पासूं हो ॥ ४ ॥
उण सूरत की बलिहारी हो, जहां दिया ज्ञान विचारी हो ॥ ५ ॥
सुखदेव बोह दुख पावे हो, वे दिन दुरलभ जावे हो ॥ ६ ॥
Vo din ko kab aasi ho
वो दिन को कब आसी हो_ हरजस पद राग धुन प्रभाती (२)
वो दिन को कब आसी हो, मारा सतगुरु मोय मिलासी हो । टेर ॥
चरणा शीश निवासुं हो, सनमुख दरशण पासूं हो ॥ १ ॥
धिन सूरज वो कवासी हो, मारा सतगुरु मोय बुलासी हो ॥ २ ॥
वा पुल को कब आवे हो, मारा गुरु की रीस बुजावे हो ॥ ३ ॥
कोई असा हरिजन आवे हो, मारा गुरु सुं मोय मिलावे हो ॥ ४ ॥
प्रभु मेरी अरज सुणिजे हो, मेरे गुरा सूं सनमुख किजे हो ॥ ५ ॥
सुखदेव करे पुकारी हो, गुरु सुणज्यो अर्ज हमारी हो ॥ ६ ॥
Dhīn dhīn bhāg hamārā ho
धिन धिन भाग हमारा हो_ हरजस पद राग धुन प्रभाती (३)
धिन धिन भाग हमारा हो, मेरा सतगुरु द्वार पधारे हो । टेर ॥
करम कीट सब भागे हो, मेरा ताला ऊदे होय जागे हो ॥ १ ॥
दुभधा दुरमत भागी हो, राम रटण लिव लागी हो ॥ २ ॥
भरम अज्ञान नसाया हो, परम चैन सुख आया हो ॥ ३ ॥
विष रस सब मिट जावे हो, ईमरत सिरा आवे हो ॥ ४ ॥
आनदेव सब भागे हो, म्हारा राम राज ऊर जागे हो ॥ ५ ॥
असंख जुगा के मांही हो, सतगुरु सम कोई नांही हो ।॥ ६ ॥
सांसा सोग मिटाया हो, जां घर सतगुरु आया हो ॥ ७ ॥
बेद कुराण सरावे हो, गुरु मेहमा हर गावे हो ॥ ८ ॥
कह सुखराम सुणाई हो, गुरां सम नहीं धर मांही हो ॥ ९ ॥
Ve miljo Harijan aani ho
वे मिलज्यो हरिजन आंणी हो_ हरजस पद राग धुन प्रभाती (४)
वे मिलज्यो हरिजन आंणी हो, जहां परम पद गत जांणी हो । टेर ॥
वे मिलिया भर्म सब जावे हो, ओ प्रांण बहोत सुख पावे हो ॥ १ ॥
वे आद अन्त का खोजी हो, वाहां भिन्न भिन्न काया खोजी हो ॥ २ ॥
वे राम भजन इधकारी हो, जां सूरत गिगन दिश धारी हो ॥ ३ ॥
वे सांसा शिवरण जाणे हो, तां सुं ही ब्रह्म बखाणे हो ॥ ४॥
वे ऊलट पिछम कूं ध्यावे हो, वे बंकनाल रस खावे हो ॥ ५ ॥
जहां रा गिगन मंडल में डेरा हो, वे समरथ सायब मेरा हो ।॥ ६ ॥
वे अणभै बाणी बोले हो, वे ज्ञान भंडारज खोले हो ॥ ७ ॥
वे अणभै ऐसी लावे हो, सब का भेद बतावे हो ॥८॥
वे सांसा कुछ नहीं राखे हो, निरभै हरि पद भाखे हो ॥ ९ ॥
कह सुखराम पुकारी हो, वे हरिजन जीवण हमारी हो ॥ १० ॥
Satguru mehma kije ho
सतगुरु मेहमा किजे हो_ हरजस पद राग धुन प्रभाती (५)
सतगुरु मेहमा किजे हो, तन मन धन सब दीजे हो । टेर ॥
वे मोख मुक्त का दाता हो, गुरु बिन नरका जाता हो ॥ १ ॥
सुण मन तोहिज बतावे हो, गुरु बिन धाम न जावे हो ॥ २ ॥
प्रेम सहित सब किजे हो, गुरु आज्ञा में रिजे हो ।॥ ३ ॥
वां सूं कछु न दुरावो हो, ज्यां कर सायब पावे हो ॥ ४ ॥
जुग जुग करम कमावे हो, गुरु शरणे सब जावे हो ॥ ५ ॥
गुरु पूजा सुख पावे हो, प्राण आद घर जावे हो ।॥ ६ ॥
सतगुरु ऐसा कुवावे हो, सुखदेव भेद बतावे हो ॥ ७ ॥
Mhaara satguru param snehi ho
म्हारा सतगुरु परम स्नेही हो_ हरजस पद राग धुन प्रभाती (६)
म्हारा सतगुरु परम स्नेही हो, राम मिल्या इण देही हो। हो । टेर ॥
जीवत मोख मिलाया हो, करम खोद सब बाया हो ॥ १ ॥
रूप न चुप न काया हो, वो मुझ देश बताया हो ॥ २ ॥
भीत दिवाल न पाया हो, ऐसा अधर घर आया हो ॥ ३ ॥
चंद न सूर न देवा हो, वां घर का सुख लेवा हो ॥ ४ ॥
ब्रह्मा विष्णु कवावे हो, ऊण घर कूं नित ध्यावे हो ॥ ५ ॥
कह सुखराम सुणाई हो, हम मिल्या आद घर जाई हो ॥ ६ ॥
Guru bich antar rakhe ho
गुरु बिच अंतर राखे हो_ हरजस पद राग धुन प्रभाती (७)
गुरु बिच अंतर राखे हो, तांकी वेद भागवत भाखे हो ॥ टेर ॥
चौरासी मांय राखे हो, मार बोहोत विध चाखे हो ॥ १ ॥
नरक निगोदा डारे हो, शरण कोई न उबारे हो ॥ २ ॥
कह सुखराम दुबध्या राखे हो, वे पार न पूथा भाखे हो ॥ ३ ॥
Wo din ko kab uge ho
वो दिन को कब ऊगे हो_ हरजस पद राग धुन प्रभाती (८)
वो दिन को कब ऊगे हो, प्राण आद घर पूगे हो । टेर ।।
धिन धिन वा पुल कवाई हो, मेरा ध्यान लगे सुन्न मांही हो ॥ १ ॥
त्रिवेणी तट धारा हो, कब न्हावे प्राण हमारा हो ॥ २ ॥
जोत अखण्डित मांही हो, कब जन देखे जाई हो ॥ ३ ॥
त्रिकुटी शहर मंझारा हो, कब आसण होय हमारा हो ॥ ४ ॥
कह सुखराम विचारा हो, अब मोय पार उतारा हो ।॥ ५॥
Aaj divas bhal ooga ho
आज दिवस भल ऊगा हो_ हरजस पद राग धुन प्रभाती (९)
आज दिवस भल ऊगा हो, मेरा प्रांण आद घर पूगा हो । टेर ॥
धिन धिन वा पुल कवाही हो, मेरा ध्यान लगा सुन्न मांही हो ॥ १ ॥
सर्वण रसना कवाही हो, एक मास पद राही हो ॥ २ ॥
कंठ शब्द पख एका हो, हिरदे मास बसेखा हो ॥ ३ ॥
नाभी में पद आया हो, बरस द्वादस गाया हो ॥ ४ ॥
जहां शेष नाग घर जागा हो, वहां एक माश दिन लागा हो ॥ ५ ॥
पिछम देश में आया हो, वहां जन बोहो दुःख पाया हो ।॥ ६ ॥
सूरग ईकीसूं छेक्या हो, जाणेगा जन देख्या हो ।॥ ७ ॥
दिवस मास पख बीता हो, जम थाणा जन जीता हो ॥ ८ ॥
मेरूडण्ड जहां घाटी हो, ऐसी ओर न बाटी हो ॥ ९ ॥
अला पिंगला जागी हो, अनहद नोपत बाजी हो ॥ १० ॥
चार मास जुग जुझया हो, तब घर आदू सुज्या हो ॥ ११ ॥
त्रिकुटी तख्त बिराजे हो, अब जन सुखदेव गाजे हो ॥ १२ ॥
Trikuti mahal anupaa ho
त्रिकुटी महल अनुपा हो_ हरजस पद राग धुन प्रभाती (१०)
त्रिकुटी महल अनुपा हो, जां रात दिवस नहीं धुपा हो । टेर ॥
सुणज्यो हरिजन आंणी हो, कहूं परमपद छांणी हो ॥ १ ॥
तीन लोक का साधा हो, वहां मठ त्रिकुटी बांधा हो ॥ २ ॥
सतलोक यां आगे हो, ज्यां जम का डर नहीं लागे हो ॥ ३ ॥
त्रिकुटी लग जम जावे हो, ब्रह्मा बिसन ढहावे हो ॥ ४ ॥
ओऊं सोऊं सांसा हो, वहां लग जम का बासा हो ॥ ५ ॥
त्रिकुटी परे मुकामा हो, नव लंघ केवल धामा हो ।॥ ६ ॥
निरंजण अवगत दोई हो, वो पद पेला होई हो ॥ ७ ॥
कह सुखराम विचारी हो, तत वां सूं पद न्यारी हो ॥ ८ ॥
Sab bharam chhaad dahije re
सब भरम छाड दइजे रे_ हरजस पद राग धुन प्रभाती (११)
सब भरम छाड दइजे रे, नकेवल नांव लहिजे रे ।। टेर ॥
हरि कूं अंतर गावो रे, भले सुण जन्म न आवो रे ॥ १॥
हरि कूं समझर गावो रे, मति ओ जन्म गमावो रे ॥ २ ॥
आयोडो मोसर जावे रे, हर कूं काय न गावे रे ॥ ३॥
भजन बिना दुख पासी रे, भुगते लख चौरासी रे ॥ ४॥
राम भजन को साजा रे, बंचत है सुर राजा रे ॥ ५ ॥
बोहोर न नरतन पासी रे, भगत बिना पिस्तासी रे ॥ ६ ॥
राम भजन के काजा रे, तू मत खोय अकाजा रे ॥ ७ ॥
तन धन जोबन माया रे, आ बादल की छाया रे ॥ ८ ॥
कह सुखराम नर देह मूंगी रे, ओ मूरख जांणे सूंगी रे ॥ ९ ॥
Hari ko bhed niyaaro re
हरि को भेद नियारो रे_ हरजस पद राग धुन प्रभाती (१२)
हरि को भेद नियारो रे, लखे कोई संत पियारो रे ॥ टेर ॥
मुक्त को भेद नियारो रे, जाणे कोई जाणन हारो रे ॥ १।
गोविन्द है ज्यं गावो रे, जिके मोने संत मिलावे रे ॥ २ ॥
हरि ब्रह्म है ज्यूं बतावे रे, ईस्यो कोई मोय जतावे रे ॥ ३ ॥
गुरां बिन भेद न पावे रे, जके सुण दोय बतावे रे ॥४॥
मुक्त कूं नांव बणायो रे, करमा सूं नरक ठेरायो रे ॥ ५ ॥
सुखदेव सतगुरु पाया रे, घट घट में बह्य बताया रे ।। ६ ।।