Tuesday, September 23, 2025

पद राग धुन प्रभाती (१-12)

 



Jyan param pad tat diya ho



हो ज्यां परम पद तत दिया हो_ हरजस पद राग धुन प्रभाती १ 


हो ज्यां परम पद तत दिया हो, मेरा भरम बिधुसण किया हो । टेर ॥ 


वे जन को कब आसी हो, वे सत लोक का वासी हो ॥ १ ॥ 


निर्भय मोकूं किया हो, परम मोख पद दिया हो ॥ २ ॥ 


धिन धिन वा पुल कुवासी हो, ज्यां दिन सतगुरु आसी हो ॥ ३ ॥ 


चरणा शीश निवासूं हो, सनमूख दरशन पासूं हो ॥ ४ ॥ 


उण सूरत की बलिहारी हो, जहां दिया ज्ञान विचारी हो ॥ ५ ॥ 


सुखदेव बोह दुख पावे हो, वे दिन दुरलभ जावे हो ॥ ६ ॥ 


Vo din ko kab aasi ho


वो दिन को कब आसी हो_ हरजस पद राग धुन प्रभाती (२)  


वो दिन को कब आसी हो, मारा सतगुरु मोय मिलासी हो । टेर ॥ 


चरणा शीश निवासुं हो, सनमुख दरशण पासूं हो ॥ १ ॥ 


धिन सूरज वो कवासी हो, मारा सतगुरु मोय बुलासी हो ॥ २ ॥ 


वा पुल को कब आवे हो, मारा गुरु की रीस बुजावे हो ॥ ३ ॥


 कोई असा हरिजन आवे हो, मारा गुरु सुं मोय मिलावे हो ॥ ४ ॥ 


प्रभु मेरी अरज सुणिजे हो, मेरे गुरा सूं सनमुख किजे हो ॥ ५ ॥


सुखदेव करे पुकारी हो, गुरु सुणज्यो अर्ज हमारी हो ॥ ६ ॥


Dhīn dhīn bhāg hamārā ho


धिन धिन भाग हमारा हो_ हरजस पद राग धुन प्रभाती (३) 


धिन धिन भाग हमारा हो, मेरा सतगुरु द्वार पधारे हो । टेर ॥ 


करम कीट सब भागे हो, मेरा ताला ऊदे होय जागे हो ॥ १ ॥ 


दुभधा दुरमत भागी हो, राम रटण लिव लागी हो ॥ २ ॥


 भरम अज्ञान नसाया हो, परम चैन सुख आया हो ॥ ३ ॥ 


विष रस सब मिट जावे हो, ईमरत सिरा आवे हो ॥ ४ ॥ 


आनदेव सब भागे हो, म्हारा राम राज ऊर जागे हो ॥ ५ ॥ 


असंख जुगा के मांही हो, सतगुरु सम कोई नांही हो ।॥ ६ ॥ 


सांसा सोग मिटाया हो, जां घर सतगुरु आया हो ॥ ७ ॥ 


बेद कुराण सरावे हो, गुरु मेहमा हर गावे हो ॥ ८ ॥


कह सुखराम सुणाई हो, गुरां सम नहीं धर मांही हो ॥ ९ ॥


Ve miljo Harijan aani ho 


वे मिलज्यो हरिजन आंणी हो_ हरजस पद राग धुन प्रभाती (४) 


 वे मिलज्यो हरिजन आंणी हो, जहां परम पद गत जांणी हो । टेर ॥


 वे मिलिया भर्म सब जावे हो, ओ प्रांण बहोत सुख पावे हो ॥ १ ॥ 


वे आद अन्त का खोजी हो, वाहां भिन्न भिन्न काया खोजी हो ॥ २ ॥


 वे राम भजन इधकारी हो, जां सूरत गिगन दिश धारी हो ॥ ३ ॥


 वे सांसा शिवरण जाणे हो, तां सुं ही ब्रह्म बखाणे हो ॥ ४॥


 वे ऊलट पिछम कूं ध्यावे हो, वे बंकनाल रस खावे हो ॥ ५ ॥ 


जहां रा गिगन मंडल में डेरा हो, वे समरथ सायब मेरा हो ।॥ ६ ॥ 


वे अणभै बाणी बोले हो, वे ज्ञान भंडारज खोले हो ॥ ७ ॥


 वे अणभै ऐसी लावे हो, सब का भेद बतावे हो ॥८॥


वे सांसा कुछ नहीं राखे हो, निरभै हरि पद भाखे हो ॥ ९ ॥


 कह सुखराम पुकारी हो, वे हरिजन जीवण हमारी हो ॥ १० ॥


Satguru mehma kije ho


सतगुरु मेहमा किजे हो_ हरजस पद राग धुन प्रभाती (५) 


सतगुरु मेहमा किजे हो, तन मन धन सब दीजे हो । टेर ॥ 


वे मोख मुक्त का दाता हो, गुरु बिन नरका जाता हो ॥ १ ॥ 


सुण मन तोहिज बतावे हो, गुरु बिन धाम न जावे हो ॥ २ ॥ 


प्रेम सहित सब किजे हो, गुरु आज्ञा में रिजे हो ।॥ ३ ॥ 


वां सूं कछु न दुरावो हो, ज्यां कर सायब पावे हो ॥ ४ ॥


 जुग जुग करम कमावे हो, गुरु शरणे सब जावे हो ॥ ५ ॥


 गुरु पूजा सुख पावे हो, प्राण आद घर जावे हो ।॥ ६ ॥                                                     


सतगुरु ऐसा कुवावे हो, सुखदेव भेद बतावे हो ॥ ७ ॥


Mhaara satguru param snehi ho


म्हारा सतगुरु परम स्नेही हो_ हरजस पद राग धुन प्रभाती (६) 


 म्हारा सतगुरु परम स्नेही हो, राम मिल्या इण देही हो। हो । टेर ॥ 


जीवत मोख मिलाया हो, करम खोद सब बाया हो ॥ १ ॥


 रूप न चुप न काया हो, वो मुझ देश बताया हो ॥ २ ॥ 


भीत दिवाल न पाया हो, ऐसा अधर घर आया हो ॥ ३ ॥ 


चंद न सूर न देवा हो, वां घर का सुख लेवा हो ॥ ४ ॥ 


ब्रह्मा विष्णु कवावे हो, ऊण घर कूं नित ध्यावे हो ॥ ५ ॥


 कह सुखराम सुणाई हो, हम मिल्या आद घर जाई हो ॥ ६ ॥ 


 Guru bich antar rakhe ho


गुरु बिच अंतर राखे हो_ हरजस पद राग धुन प्रभाती (७) 


गुरु बिच अंतर राखे हो, तांकी वेद भागवत भाखे हो ॥ टेर ॥ 


चौरासी मांय राखे हो, मार बोहोत विध चाखे हो ॥ १ ॥ 


नरक निगोदा डारे हो, शरण कोई न उबारे हो ॥ २ ॥ 


कह सुखराम दुबध्या राखे हो, वे पार न पूथा भाखे हो ॥ ३ ॥



 Wo din ko kab uge ho


वो दिन को कब ऊगे हो_ हरजस पद राग धुन प्रभाती (८) 


 वो दिन को कब ऊगे हो, प्राण आद घर पूगे हो । टेर ।।


 धिन धिन वा पुल कवाई हो, मेरा ध्यान लगे सुन्न मांही हो ॥ १ ॥


त्रिवेणी तट धारा हो, कब न्हावे प्राण हमारा हो ॥ २ ॥ 


जोत अखण्डित मांही हो, कब जन देखे जाई हो ॥ ३ ॥ 


त्रिकुटी शहर मंझारा हो, कब आसण होय हमारा हो ॥ ४ ॥ 


कह सुखराम विचारा हो, अब मोय पार उतारा हो ।॥ ५॥


Aaj divas bhal ooga ho


आज दिवस भल ऊगा हो_ हरजस पद राग धुन प्रभाती (९)  


आज दिवस भल ऊगा हो, मेरा प्रांण आद घर पूगा हो । टेर ॥ 


धिन धिन वा पुल कवाही हो, मेरा ध्यान लगा सुन्न मांही हो ॥ १ ॥ 


सर्वण रसना कवाही हो, एक मास पद राही हो ॥ २ ॥ 


कंठ शब्द पख एका हो, हिरदे मास बसेखा हो ॥ ३ ॥


 नाभी में पद आया हो, बरस द्वादस गाया हो ॥ ४ ॥


 जहां शेष नाग घर जागा हो, वहां एक माश दिन लागा हो ॥ ५ ॥


 पिछम देश में आया हो, वहां जन बोहो दुःख पाया हो ।॥ ६ ॥ 


सूरग ईकीसूं छेक्या हो, जाणेगा जन देख्या हो ।॥ ७ ॥ 


दिवस मास पख बीता हो, जम थाणा जन जीता हो ॥ ८ ॥ 


मेरूडण्ड जहां घाटी हो, ऐसी ओर न बाटी हो ॥ ९ ॥ 


अला पिंगला जागी हो, अनहद नोपत बाजी हो ॥ १० ॥ 


चार मास जुग जुझया हो, तब घर आदू सुज्या हो ॥ ११ ॥


त्रिकुटी तख्त बिराजे हो, अब जन सुखदेव गाजे हो ॥ १२ ॥ 


Trikuti mahal anupaa ho


त्रिकुटी महल अनुपा हो_ हरजस पद राग धुन प्रभाती (१०) 


 त्रिकुटी महल अनुपा हो, जां रात दिवस नहीं धुपा हो । टेर ॥


 सुणज्यो हरिजन आंणी हो, कहूं परमपद छांणी हो ॥ १ ॥


 तीन लोक का साधा हो, वहां मठ त्रिकुटी बांधा हो ॥ २ ॥ 


सतलोक यां आगे हो, ज्यां जम का डर नहीं लागे हो ॥ ३ ॥ 


त्रिकुटी लग जम जावे हो, ब्रह्मा बिसन ढहावे हो ॥ ४ ॥


ओऊं सोऊं सांसा हो, वहां लग जम का बासा हो ॥ ५ ॥ 


त्रिकुटी परे मुकामा हो, नव लंघ केवल धामा हो ।॥ ६ ॥ 


निरंजण अवगत दोई हो, वो पद पेला होई हो ॥ ७ ॥ 


कह सुखराम विचारी हो, तत वां सूं पद न्यारी हो ॥ ८ ॥ 


 Sab bharam chhaad dahije re


सब भरम छाड दइजे रे_ हरजस पद राग धुन प्रभाती (११) 


 सब भरम छाड दइजे रे, नकेवल नांव लहिजे रे ।। टेर ॥ 


हरि कूं अंतर गावो रे, भले सुण जन्म न आवो रे ॥ १॥ 


हरि कूं समझर गावो रे, मति ओ जन्म गमावो रे ॥ २ ॥ 


आयोडो मोसर जावे रे, हर कूं काय न गावे रे ॥ ३॥ 


भजन बिना दुख पासी रे, भुगते लख चौरासी रे ॥ ४॥ 


राम भजन को साजा रे, बंचत है सुर राजा रे ॥ ५ ॥


बोहोर न नरतन पासी रे, भगत बिना पिस्तासी रे ॥ ६ ॥


 राम भजन के काजा रे, तू मत खोय अकाजा रे ॥ ७ ॥ 


तन धन जोबन माया रे, आ बादल की छाया रे ॥ ८ ॥ 


कह सुखराम नर देह मूंगी रे, ओ मूरख जांणे सूंगी रे ॥ ९ ॥ 


Hari ko bhed niyaaro re


हरि को भेद नियारो रे_ हरजस पद राग धुन प्रभाती (१२) 


हरि को भेद नियारो रे, लखे कोई संत पियारो रे ॥ टेर ॥ 


मुक्त को भेद नियारो रे, जाणे कोई जाणन हारो रे ॥ १। 


गोविन्द है ज्यं गावो रे, जिके मोने संत मिलावे रे ॥ २ ॥ 


हरि ब्रह्म है ज्यूं बतावे रे, ईस्यो कोई मोय जतावे रे ॥ ३ ॥


 गुरां बिन भेद न पावे रे, जके सुण दोय बतावे रे ॥४॥


मुक्त कूं नांव बणायो रे, करमा सूं नरक ठेरायो रे ॥ ५ ॥ 


सुखदेव सतगुरु पाया रे, घट घट में बह्य बताया रे ।। ६ ।।



Mhaare paavna paramguru aaj म्हारे पावणा परमगुरु आज_ हरजस पद राग बधावा (१)

 म्हारे पावणा परमगुरु आज, संया आवो ओ।  म्हारे आया ओ हरि का जन आज, संया आवो ओ ॥ टेर ॥  आवो ओ गावो संया, आणंद बधावा।  म्हारे आंगणिये ओ साधां र...