Thursday, November 20, 2025

Main bigadā hū̃ Rām duhāī मैं बिगडया हूं राम दुहाई_ पद क्रमांक (२) मैं बिगडया हूं राम दुहाई, तुम मत बिगडो लोई रे ।। टेर ॥ सुणज्यो रे सब पुरका बासी, करम दिया सब खोई रे ॥ १ ॥ चनण के संग बागज बिगडयो, परमल चारूं दिश होई रे ॥ २ ॥ पारस के संग लोहो बिगडियो, कुल अंस रहयो यन कोई रे ॥ ३ ॥ कह सुखदेवजी भंवरा के संग, कीट पलट भंवरा होई रे ॥ ४ ॥ Pad Kramank (2) Main bigadā hū̃ Rām duhāī, tum mat bigado loī re. ṭer ॥ Suṇjyō re sab purkā bāsī, karam diyā sab khoī re. ॥ 1 ॥ Chanṇ ke sang bāgj bigadyō, paramal chārū̃ dish hoī re. ॥ 2 ॥ Pāras ke sang lohō bigadyō, kul ans rahyō yan koī re. ॥ 3 ॥ Kah Sukhdevji bhanvarā ke sang, kīt palṭ bhanvarā hoī re. ॥ 4 ॥ महाराज संसारियों से कह रहे हैं: "मैं रामजी की सौगंध खाकर कहता हूं कि मैं तो बिगड़ गया हूं, तुम मेरे साथ मत बिगड़ो। हे सभी संसारी प्राणी! सुनो, मैंने अपने सभी कर्मों का क्षय कर दिया है।जैसे चन्दन के वृक्ष के साथ जब अन्य वृक्ष रहते हैं, तो वे भी चन्दनमय हो जाते हैं और उनमें से चन्दन की सुगंध आने लगती है।जैसे पारस के स्पर्श से लोहा सोना बन जाता है, तो उसमें फिर लोहापन नहीं रह जाता, वैसे ही कुल-अंश का भी भान नहीं रह जाता।महाराज फरमाते हैं: जैसे भँवरे के साथ 'लट' रहने से वो भी भँवरा बन जाती है, उसी प्रकार मैं बिगड़ गया हूं। महाराज संसारियो के प्राणियो से कह रहे है कि मैं रामजी की सौगन्ध खाकर कहता हूं कि मैं बिगड गया हूं। तुम मेरे साथ में मत बिगडो। सब ही संसारी सुणो मैंने सब करमों का क्षय कर दिया है। जैसे चन्दन के वृक्ष के साथ बाग में जितने भी वृक्ष होते है वो सब चन्दन मय हो जाते है और उनमें चन्दन की खुशबू आने लग जाती है। पारस से लोहा सोना हो जाता है और तब उसमें लोहा पना नहीं रहता है। यही कुल अंश का नहीं रहना है। महाराज फरमाते हैं कि जैसे भंवरे के साथ लट रहने पर भंवरा हो जाती है, ऐसे ही मैं बिगडा हूं।

Mhaare paavna paramguru aaj म्हारे पावणा परमगुरु आज_ हरजस पद राग बधावा (१)

 म्हारे पावणा परमगुरु आज, संया आवो ओ।  म्हारे आया ओ हरि का जन आज, संया आवो ओ ॥ टेर ॥  आवो ओ गावो संया, आणंद बधावा।  म्हारे आंगणिये ओ साधां र...