Thursday, November 20, 2025
Sat kī bāt na melo ho sādho सत की बात न मेलो हो साधो_ हरजस पद राग केहरा (३)
सत की बात न मेलो हो साधो, सतशब्द ले खेलो हो ।। टेर ॥
सत सूं धरण आकाशज थंबिया, चंद सूर रवि तारा हो। सत सूं देवल चढ गयो इन्डो, सत सूं दुशमण मारया हो ॥ १ ॥
सत सूं पोलज मेहेरी खोली, सत सूं फोज जिवाई हो। सत सूं शीश मंगायो काने, पांडव गलया सब जाई हो ॥ २ ॥
सत राख्या सूं पत रहे है, सहाय करे हर आई हो। कह सुखराम जीव तन जातां, सत राखो ऊर मांही हो ।। ३ ।।
Harjas Pad Raag Kehra (3)
Sat kī bāt na melo ho sādho, satshabd le khelo ho. ṭer ॥
Sat sūṁ dharaṇ ākāśaj ṭhambiyā, chand sūraj ravi tārā ho.
Sat sūṁ deval chaḍ gayo indo, sat sūṁ dushman māryā ho. ॥ 1 ॥
Sat sūṁ polaj meherī kholī, sat sūṁ foj jivāī ho.
Sat sūṁ shīsh maṅgāyo kāne, pāṇḍav galayā sab jāī ho. ॥ 2 ॥
Sat rākhyā sūṁ pat rahe hai, sahāy kare har āī ho.
Kah SukhRam jīv tan jātāṁ, sat rākhō ūṛ māṁhī ho. ॥ 3 ॥
महाराज साधकों से फरमाते हैं:सत वचन बोलो, और संतों के अणभै सतज्ञान को कभी मत छोड़ो। सतशब्द में मिलने की भक्ति करो — यही जीवन का सच्चा मार्ग है।सत के आधार से ही यह धरती, आकाश, चंद्रमा, सूर्य और तारागण स्थिर हैं।सतशब्द की भक्ति करने से
शरीर के भीतर और बाहर ब्रह्माण्ड से ऊपर उठता हुआ और पारब्रह्म से भी आगे अधर सतशब्द का अखण्ड अनुभव होता है —
यही है देवल पर ईण्डो चढ़ना।पाँचों विषयों को वश में करना ही दुश्मनों को जीतना है।सत की शक्ति अनन्त है — सुनो, सत्य की प्रतिज्ञा कितनी महान है:एक पतिव्रता स्त्री के सतधारण से शहर की बंद पोलें अपने आप खुल गईं।कैकयी ने सत के प्रताप से मरी हुई फौजों को
फिर से जीवित कर दिया।श्रीकृष्ण ने भी सत के प्रताप से बर्बरीक का शीश मंगवाया।पांडवों ने सत रखने के लिए हिमालय में भी तपस्या की।सत रखने से परमात्मा स्वयं प्रण निभाते हैं और सच्चे साधकों की सहायता करते हैं।महाराज अंत में फरमाते हैं: *"चाहे जीव और शरीर भी छूट जाए, परंतु सत को कभी मत छोड़ो।"
साधको से महाराज फरमाते हैं कि सत वचन बोलो व संतो के अणभै सत ग्यान को मत छोडो, सतशब्द में मिलने की भक्ति करो। सत के आधार से धरती आकाश चन्द्रमा सूर्य तारा ठहरे हुये है। सतशब्द की भक्ति करने से शरीर में व बाहर ब्रह्मण्ड से ऊपर उठता हुआ व पार ब्रह्म से आगे अधर सतशब्द का अखण्ड अनुभव होता है, यही देवल पर ईण्डो चढना है। पांचो विषयो को वश में करना ही दुश्मन को मारना है। सत याने पतिव्रता धारण करने से शहर की पोले बन्द हो गई थी सो उस पतिव्रता स्त्री के प्रताप से अपने आप खुल गई। सत के प्रताप से कैकयी ने मरी फोजो को जिन्दा कर दिया। सत के प्रताप से कृष्ण ने बर्बरीक का शिर मंगाया, सत रखने के लिये पांडव हिमालय में गले, सत रखने से परमात्मा उसका प्रण रखते है व उनकी सहायता करते है। महाराज फरमाते हैं कि जीव व शरीर भी छूट जाये तो भी सत मत छोड़ो।
Mhaare paavna paramguru aaj म्हारे पावणा परमगुरु आज_ हरजस पद राग बधावा (१)
म्हारे पावणा परमगुरु आज, संया आवो ओ। म्हारे आया ओ हरि का जन आज, संया आवो ओ ॥ टेर ॥ आवो ओ गावो संया, आणंद बधावा। म्हारे आंगणिये ओ साधां र...
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नमो नमों गुरूदेव, परम निज भेव बताया। निर्गुण ज्ञान विचार, हंस परम हंस कुवाया ॥ नमों नमों गुरूदेव, समुद्र में डुबत तारया । नमों न...