ऐसे अवगत आप सांई, मेहमा काहा कीजिये। शेष मुखा सुं शेष गावे, तोही पार न लीजिये ॥ टेर ॥
फूल्यो हिरणाक बहुत भारी, शिव बिस्न ब्रह्मा हारियो। आप अवगत मांय निकसे, पटक राक्षस मारियो ॥ १ ॥
हरे वेद चारूं देत, धस्यो समंद मांही। जब दुज उठ के, प्रणाम कियो सांई ॥ २ ॥
समंद सब मथ सोज, संख मरोड लिया। ब्रह्मा कूं बेद हरी, आप आण दिया ॥ ३ ॥
शिव में भीड गाढी पडी, मोहनी रूप धारियो। कह सुखराम मार दुष्ट, शिव को कारज सारियो ॥ ४ ॥
Harjas Pad Raag Charchari (2)
Aise avagat aap Saai, mehmaa kaha kijiye. Shesh mukha soon shesh gaave, tohi paar na lijiye. (Ter)
Phoolyo Hiranak bohot bhaari, Shiv Bisn Brahma haariyo.
Aap avagat maay nikse, patak rakshas maariyo. ॥1॥
Hare Ved charoon det, dhasyo samand maahi.
Jab duj uth ke, pranam kiyo Saai. ॥2॥
Samand sab math soj, sankh marod liya.
Brahma koon Ved Hari, aap aan diya. ॥3॥
Shiv mein bheed gaadhi padi, mohni roop dhaariyo.
Kah Sukhram maar dusht, Shiv ko kaaraj saario. ॥4॥
परमात्मा की महिमा का वर्णन ❖
हे परमात्मा! आप पूर्ण रूप से अवगत, सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान हैं। आपकी महिमा का वर्णन करना मेरे लिए अत्यंत कठिन है।हजारों मुखों वाला शेषनाग भी आपके यश का गान करते-करते आपकी महिमा का पार नहीं पा सका।जब हिरणाक्ष राक्षस अत्यंत बलवान हो गया था, तब ब्रह्मा, विष्णु और महादेव जैसे देवता भी उससे पराजित हो गए थे। तब आपने ही उसके हाथ से प्रकट होकर उस राक्षस का वध किया
और देवताओं की रक्षा की।जब शंखासुर राक्षस चारों वेदों को चुराकर समुद्र में छिप गया, तब ब्रह्माजी ने आपसे प्रार्थना की। आपने समुद्र का मंथन कर उसे सोध (शुद्ध) किया, राक्षस को मार डाला और चारों वेद वापस ब्रह्माजी को प्रदान किए।जब भगवान शंकर (शिवजी) कट में पड़े और भस्मासुर ने उन्हें मारने का प्रयास किया, तब आपने मोहिनी रूप धारण कर उस भयानक राक्षस को भी छलपूर्वक मार डाला
और शिवजी की रक्षा की।