ऐसे श्याम राम, भगत बिछल कवायो। ज्यां ज्यां भीड पडी भगतन में, तांहा तांहा दौड आयो । टेर ॥
गही जब दुषाशन द्रोपत, ध्यान तेरो कियो। बध्यो चीर गज सेहस, पत राख लियो ।॥ १ ॥
ध्रुव छाड घर कूं गयो बन में, अंतर ध्यान तेरो धरयो। आप अवगत ऐसे सांई, अटल राज ध्रुव ने करयो ॥ २ ॥
हिरणा कूं मार पृथ्वी राख लिवी, प्रहलाद जन उबारियो। गज ग्राह फंद काट, किचक दाणो मारियो ॥ ३ ॥
लाख मेहल रखे पाण्डव, दल बिच भंवरी व्यात है। सुखराम राम मीरां लियो, ऐसे अवगत नाथ है ॥ ४॥
Harjas Pad Raag Charchari (4)
Aise Shyam Ram, bhagat bichhal kavayo. Jyaan jyaan bheed padi bhagatan mein, taaneha taaneha daud aayo. (Ter)
Gahi jab Dushashan Droupat, dhyaan tero kiyo.
Badhyo cheer gaj sehas, pat rakh liyo. ॥1॥
Dhruv chhaad ghar koon gayo ban mein, antar dhyaan tero dharyo.
Aap avagat aise Saai, atal raaj Dhruv ne karyo. ॥2॥
Hirana koon maar Prithvi rakh livi, Prahlaad jan ubaariyo.
Gaj graah fand kaat, Kichak daano maariyo. ॥3॥
Laakh mehal rakhe Pandav, dal bich bhanwari vyaat hai.
Sukhram Ram Miran liyo, aise avagat Naath hai. ॥4॥
❖ प्रभु भक्तों के रक्षक हैं ❖
हे रामजी महाराज! आप भक्तों की रक्षा करने वाले हैं। जहाँ-जहाँ आपके भक्तों को कष्ट होता है, आप वहाँ स्वयं पधारते हैं और उनके कष्टों का निवारण करते हैं।जब दुःशासन ने द्रौपदी का चीर खींचा, तब द्रौपदी ने करुण भाव से आपसे प्रार्थना की। आपने वस्त्र रूप धारण कर उसकी रक्षा की और अपनी बिडद (मर्यादा / परंपरा) को निभाया।ध्रुवजी ने जब घर छोड़कर वन में जाकर अंतर में आपका ध्यान किया,
तो आपने उन पर कृपा करके उन्हें अटल राज्य प्रदान किया।आपने हिरण्यक्ष जैसे राक्षस का वध कर पृथ्वी की रक्षा की, और प्रह्लादजी को मृत्यु से बचाया।जब मगर (मगरमच्छ) ने गज (हाथी) को पकड़ लिया, तब आपने सुदर्शन चक्र से मगर को मारकर हाथी की रक्षा की।
आपने किचक राक्षस का वध भी किया, जो द्रौपदी को अपमानित कर रहा था।जब पाण्डवों को लाक्षागृह (लाख के महल) में जलाने की साजिश रची गई, तब भी आपने उन्हें बचाया।पाण्डवों और कौरवों की महाभारत की लड़ाई में भी — आपने टिटहरी (टिटोडी) के अंडों की रक्षा की, जो युद्ध भूमि में भी अपनी आशा से बैठी रही — क्योंकि वह जानती थी कि "भगवान सच्चे रक्षक हैं।"महाराज फरमाते हैं: मीरा बाई ने भी आपकी भक्ति की, विष पीया, अपमान सहे — लेकिन आपने हर बार उसकी रक्षा की।इसलिए हे प्रभु! आप ही सच्चे, अवगत, अंतर्यामी परमात्मा हैं।