Saturday, August 23, 2025

Baanda yo bhed yaan nahin paayo_ बांदा यो भेद यां नहीं पायो। ब्रह्मा बिसन महेशर शक्ति_हरजस पद राग आसा (१२)

                                               


                                          

  बांदा यो भेद यां नहीं पायो। ब्रह्मा बिसन महेशर शक्ति, नहीं अवतारा रे आयो । टेर ॥ 


सतगुरु बिना कला ज्यां जागी, से नर ऐसा भाई। अनन्त जीव ले ऊधरे जुग में, आड पटक नहीं कोई ॥ १ ॥


 आनन्द ब्रह्म की छांया कहिजे, ज्यां आ सता कहावे। है अनाद आद सुंई आगे, ऊलट कोई जन पावे ॥ २ ॥


 सुण चोईस तिरथंगर आया, ज्यां रे गुरु कुण होई। ज्यां संग अनन्त मिल्या केवल में, कसर रही नहीं कोई ॥ ॥३॥


 हुणकाल लग सबे ऊपाया, गुरु शिष चलिया आवे। करणी करे जिस्या फल जुग में, हंस ईधक किम पावे ॥ ४ ॥


 सब ही ज्ञान विद्या सब सांची, होणकाल लग भाई। मोख मिले ज्यां सता प्रगटी, और उपाय न कांई ॥ ५ ॥


 और बस्त का बीज जगत में, कै कर उपाय जगावे। मिण के बीज नहीं पारस के, नां किया बण आवे ॥ ६ ॥


 मेहमा करी बतायो सब ने, शिंभु वचन में भाई। आ ज्यां सता प्रगटी जहां जहां, करणी रहे न कांई ॥ ७ ॥ 


आ पारख कर देखो जग में, जिण या कुदरत पाई। आप रया जहां लग हंस तिरिया, पाछे एक न भाई ॥ ८ ॥ 


ओर ज्ञान मेहर लारे सुणियो, बीज शकल में रेहे। करणी करर फेर जगावे, सिध कला कोई लेहे ॥ ९ ॥ 


ईण तो सता मांय गुण ओई, ज्युं पारस में होई। मिलीया लोह कनक सब होई, होवे आगे व्हे न कोई ॥ १० ॥ 


राज जोग कहिये ओ जुग में, ओर केण सब होई। नाडा उलट चढे गढ ऊपर, अटक्यो रे नहीं कोई ॥ ११ ॥


 तत चीन कर थिर नर हुवा, राज योग यो नांई। आ तो नकल असल आ कहिये, उलट अगम घर जाई ॥ १२ ॥


 कह सुखराम सुणो सब ज्ञानी, ईण विध समझो आई। जप तप ज्ञान बताई कुच्यां, ज्यां आ सता न पाई ॥ १३ ॥



Banda yo bhed yaan nahin paayo. Brahma, Bisn,

 Maheshar, Shakti, nahin avtara re aayo. (Ter)

Satguru bina kala jyaan jaagi, se nar aisa bhai

. Anant jeev le udhre jug mein, aad patak nahin koi. (1)

Anand Brahm ki chhaaya kahiye, jyaan aa sata kahaave.

 Hai anaad aad suni aage, ulat koi jan paave. (2)

Sun choyis tirthangar aaya, jyaan re guru kun hoi.

 Jyaan sang anant milya keval mein, kasar rahi nahin koi. (3)

Hunkal lag sabe upaaya, guru shish chalya aave.

 Karni kare jisya phal jug mein, hans idhak kim paave. (4)

Sab hi gyan vidya sab sanchi, honkal lag bhai.

 Mokh mile jyaan sata pragati, aur upaay na kaanhi. (5)

Aur bast ka beej jagat mein, kai kar upaay jagaave. 

Min ke beej nahi paras ke, na kiya ban aave. (6)

Mehma kari batayo sab ne, Shimbhu vachan mein bhai.

 Aa jyaan sata pragati jahaan jahaan, karni rahe na kaanhi. (7)

Aa parakh kar dekho jag mein, jin ya kudrat paai.

 Aap rahya jahaan lag hans tiriya, paache ek na bhai. (8)

Aur gyan mehar laare suniyo, beej shakal mein rehen. 

Karni kar fer jagaave, sidh kala koi lehe. (9)

In toh sata maay gun oyi, jyun paras mein hoi.

 Miliya loh kanak sab hoi, hove aage vhe na koi. (10)

Raj jog kahiye o jug mein, or ken sab hoi.

 Naada ulat chadhe gadh upar, atkyo re nahi koi. (11)

Tat chin kar thir nar huva, Raj Yog yo naayi. 

Aa toh nakal asal aa kahiye, ulat agam ghar jaayi. (12)

Kah Sukhram suno sab gyani, in vidh samjho aayi.

 Jap tap gyan bataai kuchya, jyaan aa sata na paai. (13)


यह भेद याने सतशब्द का भेद ब्रह्मा, विष्णु, महादेव, शक्ति और अवतारों को भी नहीं मिला। बिना सतगुरु याने सत ज्ञान के सुने बिना जिनके सतशब्द की जागृति हुई,वे केवली भगवंत सम्राट की पदवी जैसे हैं, उनके द्वारा अनंत हंसों का उद्धार , धाम पधारने के बाद भी उनके अणभै ज्ञान से होता है, कोई नहीं रोक सकता। जहाँ सत्ता की जागृति होती है वो आनंद ब्रह्म की छाया है। आनन्द ब्रह्म का पद अनादि से है, होणकाल ब्रह्म से भी आगे है। बंकनाल में उलटकर कोई जन उसको प्राप्त कर सकते हैं। चौबीस तीर्थंकरों के कोई गुरु नहीं थे। उनके ज्ञान द्वारा अनन्तों हंसों को केवल पद की प्राप्ति हुई, कोई तरह की कसर नहीं रही। होणकाल ब्रह्म का पद करणी के साधन से प्राप्त हो सकता है। गुरु करणियां का ज्ञान बताकर उसकी प्राप्ति करा देते हैं। जैसी जैसी करणी करते हैं उसको उस फल की प्राप्ति होती है, उससे अधिक फल नहीं मिलता। सब ज्ञान विद्या सच्ची है, होणकाल की प्राप्ति के लिए। परन्तु मोक्ष तो जहाँ सत्ता प्रगट होती है उनको ही मिलती है और कोई उपाय नहीं है। अन्य वस्तु के बीज संसार में मेहनत करके पैदा कर सकते हैं लेकिन चिंतामणि और पारस का बीज नहीं है और न करने से बनते हैं। महादेवजी ने इस सत्ता की सबको महिमा बताई, जहाँ पर सत्ता याने सतशब्द प्रगट होता है वो इसके साथ शुभ अशुभ करणियों से अलग हो जाता है। यह परीक्षा करके देखो जिसको इस कुदरत कला की प्राप्ति हुई, आप रहे जब तक हंसों का उद्धार हुआ, पीछे एक भी नहीं हुआ। कुदरत कला के बिना तो दूसरे ज्ञान तो उनके जाने के बाद भी रहता है। करणियों के साधन करके सिद्ध कला की प्राप्ति करते हैं, यह सत्ता नकल है। सतशब्द के साथ उलटकर अगम घर केवल पद आनन्द पद की प्राप्ति करना ही असल है। महाराज फ़रमाते हैं कि सब ज्ञानी सुनो इस विधि से समझो, जप तप ज्ञान व योग की साधन बताते हैं, उनको सत्ता याने सतशब्द का ज्ञान प्राप्त नहीं हुआ।

Mhaare paavna paramguru aaj म्हारे पावणा परमगुरु आज_ हरजस पद राग बधावा (१)

 म्हारे पावणा परमगुरु आज, संया आवो ओ।  म्हारे आया ओ हरि का जन आज, संया आवो ओ ॥ टेर ॥  आवो ओ गावो संया, आणंद बधावा।  म्हारे आंगणिये ओ साधां र...