Saturday, August 30, 2025

Santo main to karam abhagi संतो मैं तो करम अभागी_ हरजस पद राग बिहंगडो (२१)


संतो मैं तो करम अभागी। पूरब करम ईस्या मुज मांही, दुबघ्या अजहूं न भागी ।। टेर ।। 

सतगुरु मेरे किरपा किनी, घर बैठा पद दिया। मेरा लछ ईस्या ऊर मांही, दरशण जाय नहीं किया ।। १ ।। 

ज्यां पद पूरण मोकूं दिया, भरम भांज समझाया। वाकूं छोड दिया, गुरु ओरी, ऐसा करम कमाया ।। २ ।। 

वां मोसुं ऐसा गुण किया, जम दावा सब मेटया। धिरग धिरग जो जुग जनम हमारो, सनमुख जाय न भेटया ।। ३ ।। 

धिन सतगुरु धिन समरथ स्वामी, मेरी कसर न जोई। मैं तो बेल बोहत बिद हुवा, गुरु बिरच्या नहीं कोई ।। ४ ।।

 कह सुखराम मुवा मैं डोलूं, जन्म अकाजा भाई। जब लग मेरे गुरु की सेवा, मो सुं बणेहन कांई ।। ५ ।। 

Harjas Pad Raag Bihangdo (21)

Santo main to karam abhagi. Poorab karam eesya muj maahin, dubaghya ajhoon na bhaagi. || Ter ||

Satguru mere kirpa kinee, ghar baitha pad diya.
Mera lachh eesya oor maahin, darshan jaay nahin kiya. || 1 ||

Jyaan pad pooran mokoon diya, bharam bhanj samjhaya.
Va koon chhod diya, guru oree, aisa karam kamaaya. || 2 ||

Waan mosoon aisa gun kiya, jam daava sab metya.
Dhirag dhirag jo jug janam hamaro, sanmukh jaay na bhet ya. || 3 ||

Dhin satguru dhin samrath swami, meri kasar na joi.
Main to bel bohot bid huwa, guru birchya nahin koi. || 4 ||

Kah Sukhram muva main doloon, janm akaaja bhai.
Jab lag mere guru ki seva, mo soon banehan kaai. || 5 ||


संतों से महाराज फरमाते हैं कि, "मैं तो कर्म अभागी हूँ। मेरे पहले के कर्म ऐसे हैं कि मेरी शंका अभी तक नहीं गई है। सतगुरु देव यानी केवल भगवंत ने कृपा करके मेरे को इस शरीर से पूर्ण पद की प्राप्ति कराने का ज्ञान दिया। लेकिन मेरे तो लक्षण ही ऐसे हैं कि मैंने उनके जाकर कभी दर्शन भी नहीं किए। यानी ज्ञान धारण नहीं किया। उन्होंने मेरे सब भ्रमों को मिटाकर समझाया और पूर्ण पद की प्राप्ति का ज्ञान समझाया, ऐसे गुरु को छोड़कर दूसरे गुरु किए। मैंने तो ऐसे कर्म किए हैं, उन्होंने तो मेरा जन्मना-मरना मिटाने की विधि समझाई। ऐसा गुण किया, पर मेरे जन्म को धिक्कार है कि उनके सम्मुख जाकर कभी दर्शन यानी भजन करके सतशब्द का अनुभव भी नहीं किया। सतगुरु यानी सतज्ञान को धिन है। परमात्मा को धिन है जो मेरे अवगुण नहीं देखे, मैंने कितनी ही बार मनुष्य शरीर रूपी बेल प्राप्त की। लेकिन मैं ऐसे ओधाधारी गुरुदेव के सम्मुख नहीं हुआ। इसलिए मनुष्य जन्म मिलने के बाद भी मरे हुए के समान डोलता रहा और मेरा जन्म ऐसे ही जा रहा है। जब तक मैं भक्ति करके गुरु पद में नहीं पहुंच जाऊँ, तब तक मेरे से गुरु सेवा नहीं हुई।"


Mhaare paavna paramguru aaj म्हारे पावणा परमगुरु आज_ हरजस पद राग बधावा (१)

 म्हारे पावणा परमगुरु आज, संया आवो ओ।  म्हारे आया ओ हरि का जन आज, संया आवो ओ ॥ टेर ॥  आवो ओ गावो संया, आणंद बधावा।  म्हारे आंगणिये ओ साधां र...