Thursday, November 20, 2025

Bāndā neh añchar tatt sāncho बांदा नेः अँच्छर तत सांचो_हरजस पद राग आसा (२७) 150425 बांदा नेः अँच्छर तत सांचो। प्रेम बिना भक्ति नव जुग में, यांरो हेत सुण काचो ॥ टेर ॥ बेद व्यास बिन व्यास हुवा रे, आज लग जुग मांही। वेद पुराण बांच कर तिरिया, तके कहो क्यूं नां हो क्यूं नांही ॥ १ ॥ वेद पुराण सुण कुण तिरिया, बिना परिक्षीत भाई। सो तुम सोज बताओ हमको, आज लग जुग मांही ॥ २ ॥ तन मन अरप बन्दगी करके, जन तिरिया जुग मांही। द्वापुर करे अनन्त की सायद, नर सब केता जाही ॥ ३ ॥ व्यास तिरिया सो कहिये मोही, प्रगट शायद लावो। वेद व्यास कूं सब जग जांणे, असो आण बतावो ॥ ४ ॥ पुराण छोडकर जप तप किया, कह किण भक्त समाई। ज्यां पुराण को काहा सुण बटियो, कहन सुणन को भाई ॥ ५ ॥ बेद पुराण सुणिया नहीं पढिया, गीता कोई पत नांही। नांव रटे रट अनन्त ऊधरिया, सो प्रगट जुग मांही ॥ ६ ॥ जप तप करे भक्त किण तिरिया, से नहीं पुंथा कोई। तुम बांचर पुराण मोख को चावो, ओ बडो अचंबो मोही ॥ ७ ॥ कह सुखराम सुणो सब ज्ञानी, पाछा सुं बुध लावो। कुण कुण ज्ञान तिरिया जन कैसे, सोड़ सोड़ विध समावो ॥ ८॥ Harjas Pad Rāg Āsā (27) – 150425 Bāndā neh añchar tatt sāncho. Prem binā bhakti nav jug mein, yāro het suṇ kācho. ṭer ॥ Bed Vyās bin Vyās huā re, āj lag jug mā̃hī. Ved Purān bā̃ch kar tiriyā, take kaho kyū̃ nā̃ ho kyū̃ nāhī. ॥ 1 ॥ Ved Purān suṇ kuṇ tiriyā, binā parīkṣīt bhāī. So tum soj batāo hamko, āj lag jug mā̃hī. ॥ 2 ॥ Tan man arap bandgī karke, jan tiriyā jug mā̃hī. Dvāpur kare anant kī sāyad, nar sab ketā jāhī. ॥ 3 ॥ Vyās tiriyā so kahiye mohi, pragaṭ sāyad lāvo. Ved Vyās kũ sab jag jāṇe, aso āṇ batāvo. ॥ 4 ॥ Purān choḍkar jap tap kiyā, kah kiṇ bhakt samāī. Jyā̃ Purān ko kahā suṇ baṭiyo, kahan suṇan ko bhāī. ॥ 5 ॥ Bed Purān suṇiyā nahī̃ paḍhiyā, Gītā koī pat nāhī. Nā̃v raṭe raṭ anant ūdhariyā, so pragaṭ jug mā̃hī. ॥ 6 ॥ Jap tap kare bhakt kiṇ tiriyā, se nahī̃ puñthā koī. Tum bā̃nchar Purān mokh ko chāvo, o baḍo acambo mohi. ॥ 7 ॥ Kah Sukhārām suṇo sab gyānī, pāchā sũ budh lāvo. Kuṇ kuṇ gyān tiriyā jan kaise, soḍ soḍ vidh samāvo. ॥ 8 ॥ महाराज मन से फ़रमाते हैं कि निज नांव नेः अँच्छर जो ब्रह्म का निजी नांव है, वो सच्चा है। बिना प्रेम के नवधा भक्ति का जो प्रेम है, वो कच्चा है। वेद व्यासजी के लड़के सुखदेवजी के अलावा अनेक व्यास संसार में हुए हैं, उनमें से किसी का वेद-पुराण पढ़कर मोक्ष हुआ हो तो बताओ। राजा परीक्षित के अलावा वेद-पुराण सुनकर अब तक किसकी मुक्ति हुई है, सो सोचकर बताओ। जिन्होंने तन-मन लगाकर साधन किए, उन्हें ही उस पद की प्राप्ति हुई, चार युगों में अनन्त की साक्षी है और सब यही कहते हैं। केवल वेद-पुराणों को बाँचकर किसी को मोक्ष की प्राप्ति हुई हो तो प्रगट उदाहरण दो। जैसे वेद व्यासजी के लड़के को सब कहते हैं, वो मोक्ष में गये हैं और सारा संसार जानता है, ऐसा उदाहरण दो। पुराणों को छोड़कर किसी ने जप किया, तप किया और भक्ति की है, उनको पुराणों से क्या मतलब है, केवल कहने-सुनने की बात है। वेदों को, पुराणों को न तो सुना है, न ही पढ़ा है, न ही गीता पढ़ी है, केवल नांव की भक्ति करने वाले अनन्तों का उद्धार हुआ है। इसकी प्रगट साक्षी देते हैं। जप करके, तप करके बिना भेद के भक्ति करने वाले मोक्ष में नहीं पहुँचे और तुम पुराण बाँचकर मोक्ष की प्राप्ति करना चाहते हो, यह मुझे बड़ा आश्चर्य है। महाराज फ़रमाते हैं कि सब ज्ञानी सुनो, अपनी बुद्धि लगाकर सोचो, किस-किस ज्ञान को धारण करने से किस-किस पद की प्राप्ति हुई, वही विधि धारण करो।

Mhaare paavna paramguru aaj म्हारे पावणा परमगुरु आज_ हरजस पद राग बधावा (१)

 म्हारे पावणा परमगुरु आज, संया आवो ओ।  म्हारे आया ओ हरि का जन आज, संया आवो ओ ॥ टेर ॥  आवो ओ गावो संया, आणंद बधावा।  म्हारे आंगणिये ओ साधां र...