Friday, November 21, 2025

Dhin dhin ho dhin Ram naam धिन धिन हो धिन राम नाम_ हरजस पद राग बसन्त (१०) 

 धिन धिन हो धिन राम नाम, तासे अखण्ड अधर पर सहज धाम ॥ टेर ॥ 
 प्रथम धिन सतसंग होय, ज्यां गुरुदेव मिलाया मोय। 
भांत भांत सो भरम जांण, निरभै ज्ञान दिया ऊर आंण ॥ १ ॥ 
 पूरब जन्म हमारो धिन, सुखरत शुभ किया इण मन।
 तां की विध अब मिली आय, राम धुन लागी ऊर मांय ॥ २ ॥
 धिन धिन भाग हमारो जांण, ताके मीत राम सा हुवा आंण। 
दुख सुख भरम मिटाया दोय, सुरग नरक सांसो नहीं कोय ॥ ३ ॥
 धिन धिन मन हमारो होय, जिन हरि भक्ति संभाई जोय। 
आठ पोहोर रटयो निज नाम, कह सुखराम सरे सब काम ॥ ४ ॥
 Harjas Pad Raag Basant (10) 
Dhin dhin ho dhin Ram naam, taase akhand adhar par sahaj dhaam. ॥ Ter ॥
 Pratham dhin satsang hoy, jyaan Gurudev milaya moy.
 Bhaant bhaant so bharam jaan, nirbhai gyaan diya oor aan. ॥ 1 ॥
 Poorab janm hamaro dhin, sukhrat shubh kiya in man.
 Taan ki vidh ab mili aay, Ram dhun lagi oor maay. ॥ 2 ॥
 Dhin dhin bhaag hamaro jaan, taake meet Ram sa huwa aan. 
 Dukh sukh bharam mitaaya doy, surg narak saanso nahin koy. ॥ 3 ॥
 Dhin dhin man hamaro hoy, jin Hari bhakti sambhai joy. 
 Aath pohor ratyo nij naam, kah Sukhram sare sab kaam. ॥ 4 ॥

 राम नाम और सतगुरु की कृपा का महात्म्य 
राम नाम को धिन (धन्य) है, जिसके द्वारा खण्ड-पिण्ड, ब्रह्माण्ड और पारब्रह्म से भी ऊपर — अधर शब्द का अनुभव होता है। सबसे पहले तो सत्संग को धिन है, जिससे मुझे सतगुरु के अणभै (निर्भय/गूढ़) ज्ञान की प्राप्ति हुई। जिसके द्वारा अनेक प्रकार के भ्रम मिटे, और मुझे केः पद और आः पद का साक्षात ज्ञान हुआ।मेरा पूर्व जन्म भी धिन है, जिसमें इस मन ने शुभ कर्म किए थे — उन्हीं का फल है कि आज यह आत्मा रटने और बिना रटने, दोनों अवस्थाओं में सतशब्द की अखण्ड ध्वनि का अनुभव कर रही है।हमारा भाग्य धिन है, जिसके कारण रामजी की प्राप्ति हुई। सुख-दुख, स्वर्ग-नरक के भय, और सभी भ्रमों का अंत हो गया।हमारा मन धिन है, जो अब रामजी की भक्ति में ही लगा हुआ है।महाराज फरमाते हैं: जो आठों पहर (रात-दिन निरंतर) निज नाम की भक्ति करता है, वह जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है।यही है वह सच्चा कार्य, जिसे पूर्ण करना ही जीवन का सार है।

Mhaare paavna paramguru aaj म्हारे पावणा परमगुरु आज_ हरजस पद राग बधावा (१)

 म्हारे पावणा परमगुरु आज, संया आवो ओ।  म्हारे आया ओ हरि का जन आज, संया आवो ओ ॥ टेर ॥  आवो ओ गावो संया, आणंद बधावा।  म्हारे आंगणिये ओ साधां र...