Friday, November 21, 2025

Dhirag dhirag ho man dhirag toy धिरग धिरग हो मन धिरग तोय_हरजस पद राग बसन्त (५)

 धिरग धिरग हो मन धिरग तोय, गुरु गम छाड जग बश होय ।। टेर ।।
 लिव भजन छाड कर कथे है ज्ञान, जप धरम करत नर बंधे मान ।। 
हर सुख छाड माया मन चाय, तज ध्यान ठौर जग रमण जाय ॥ १॥ 
 अष्ट पोहर रट राम राय, पल निमक एक नहीं ढील खाय। 
सुण एक लेस ऊर मांही जांण, जुग जुग पूजे सो मोही आंण ॥ २ ॥
 देह भांग भख भूर कीन, सब सुख छाड कर भयो है लीन।
 सुण एक पंथ ऊर अरथ चाय, फिट भगत बीच आरे हो संभाय ॥ ३ ॥
 धिरग धिरग हो मन तोय, गुरु देव छाड शिष बस होय। 
कह सुखराम कजी सो काढ, कसर कोरनो शीश बाढ ॥ ४ ॥
 Harjas Pad Raag Basant (5) 
Dhirag dhirag ho man dhirag toy, guru gam chhad jag bash hoy. ॥ Ter ॥
Liv bhajan chhad kar kathe hai gyaan, jap dharam karat nar bandhe maan.
 Har sukh chhad maaya man chaay, taj dhyaan thaur jag raman jaay. ॥ 1 ॥
 Asht poher rat Ram raay, pal nimak ek nahin dheel khaay. 
 Sun ek les oor maahi jaan, jug jug pooje so mohi aan. ॥ 2 ॥ 
Deh bhaang bhakh bhoor keen, sab sukh chhad kar bhayo hai leen.
 Sun ek panth oor arth chaay, phit bhagat beech aare ho sambhaay. ॥ 3 ॥
 Dhirag dhirag ho man toy, guru dev chhad shish bas hoy.
 Kah Sukhram kaji so kaadh, kasar korno sheesh baadh. ॥ 4 ॥
 मन को उपदेश: 
सच्चे भजन का मार्ग महाराज मन से कहते हैं: "हे मन! तुझे धिक्कार है, धिक्कार है, जो तू सतगुरु के अणभै ज्ञान को त्यागकर जगत की माया के अधीन हो गया है।तू सच्चे भजन की लिव (एकाग्रता) को छोड़कर, अन्य ज्ञानों में उलझा हुआ है। जप, तप और धर्म करके तू मान और प्रतिष्ठा चाहता है।तू परमात्मा के सुखों को छोड़कर, माया की तुच्छ इच्छाओं को अपनाना चाहता है। परमात्मा के ध्यान को त्यागकर जगत में भटकता फिरता है।रात-दिन आठों पहर, रामजी का भजन कर — एक पल भी ढील मत दे। इस एक बात को हृदय में दृढ़ता से धारण कर — कि युगों-युगों से लोग पूज्य बनने के लिए तन को कष्ट देकर कर्म करते आ रहे हैं, परंतु यदि भक्ति नहीं है, तो वह सब अर्थहीन है — केवल धिक्कार है।हे मन! तुझे धिक्कार है, जो तू सत की भक्ति को त्यागकर, असत (मायिक) भक्ति करता है। यह तो वैसा ही है जैसे गुरुदेव को छोड़कर शिष्य के वश में होना।महाराज कहते हैं: जो भी भ्रम, गलती और भक्ति में जो भी कसर बाकी है, उन्हें निकाल फेंक — और रामजी के भजन में पूर्ण रूप से लग जा।

Mhaare paavna paramguru aaj म्हारे पावणा परमगुरु आज_ हरजस पद राग बधावा (१)

 म्हारे पावणा परमगुरु आज, संया आवो ओ।  म्हारे आया ओ हरि का जन आज, संया आवो ओ ॥ टेर ॥  आवो ओ गावो संया, आणंद बधावा।  म्हारे आंगणिये ओ साधां र...