Thursday, November 20, 2025

Jeev base kis thaudजीव बसे किस ठौड_ हरजस पद राग मंगल (१३) जीव बसे किस ठौड, निकस कहां जायगो। ओ तन छाड्या हंस, कहो काहा खायगो ।। १ ।। यांको अरथ विचार, भगत सो कीजिये। शीव बसे किण जाग, भेद ओ दीजिये ।। २ ।। शब्द कोहो किण रूप, अरथ ओ कीजिये। नितर करूं गुरु और, समझ गम लीजिये ।। ३ ।। शिवरण को घर कोण, किसी राह ध्याइये। कह सुखराम हरि नाम, निरख किम पाइये ।। ४ ।। Harjas Pad Raag Mangal (13) Jeev base kis thaud, nikas kahaan jaaygo. O tan chhadiya hans, kaho kaaha khaaygo. || 1 || Yaanko arath vichaar, bhagat so keejiyé. Shiv base kin jaag, bhed o deejiyé. || 2 || Shabd koho kin roop, arath o keejiyé. Nitar karoon guru aur, samajh gam leejiyé. || 3 || Shivaran ko ghar kaun, kisi raah dhyaaiyé. Kah Sukhram Hari naam, nirkh kim paaiyé. || 4 ||

जीवात्मा ने अपना पहला कर्म (गलती) कहाँ किया था?सबसे पहली बार उस 'आदि पुरुष' (परमात्मा/ब्रह्म) से बिछड़ी थी, तब तो संसार था ही नहीं

हरजस पद राग मिश्रीत (५)   संत सुखराम जी महाराज का यह हरजस अत्यंत तार्किक, दार्शनिक और सुरति-शब्द योग के सबसे बड़े रहस्य का उद्घाटन करने व...