Thursday, November 20, 2025
Jeev ko kanth sthaan hai जीव को कंठ स्थान है_ हरजस पद राग मंगल (१४) में १३ का अरथ
जीव को कंठ स्थान है, निकस वासना जहां जावेगा।
ओ तन छोड़ जीव, कीयो फल खावसी ।।
शीव बसे सो जाग दशवों द्वार छे। शबद सो रूप, पोप वास जैसो है।।
शिवरण को घर प्रेम, पवन की राहा ध्याइये।
भजन कर नांव उलटे सुरत मन आ फेहेर पावसी। अरथ सम्पूर्ण संत सुखरामजी कहया।
Harjas Pad Raag Mangal (14) – Arath of 13
Jeev ko kanth sthaan hai, nikas vaasna jahan jaavega.
O tan chhod jeev, keeyo phal khaavsi.
Shiv base so jaag, dashvon dwaar chhe.
Shabad so roop, pop vaas jaiso hai.
Shivaran ko ghar prem, pavan ki raaha dhyaaiye.
Bhajan kar naav ulte surat, man aa feher paavsi.
Arath sampoorn Sant Sukhramji kahya.
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