मन भजिये हो नित राम नाम, ज्यां से शकल मनोरथ सजे काम ॥ टेर ॥
व्यास किशन रघुनाथ जांण, धूव नारद शनकाद आंण।
ब्रह्मा विष्णु महेश देव, नित पारब्रह्म की लग सेव ॥ १ ॥
रूखमांगद अर्जुन जांण, भीष्म द्रोण सुख संजेय बखाण।
प्रहलाद पांडव अमरीष होय, ओ भी भज्यो नित राम जोय ॥ २ ॥
पाराशर रिष रूम जांण, पृथु साल जन भरत मान।
हंस ध्वज जुग रूप सूर, हर गाय परसिया ब्रह्म नूर ॥ ३ ॥
पिपलाद हरि किवलाद होय, रिष रिषभ देव अवतार जोय।
जन केत देव सुखदेव जान, सब समझवान भये लीन आन ॥ ४ ॥
Harjas Pad Raag Basant (3)
Man bhajiye ho nit Ram naam, jyaan se shakal manorath saje kaam. ॥ Ter ॥
Vyaas Kishan Raghunath jaan, dhuv Narad Shankad aan.
Brahma Vishnu Mahesh Dev, nit Parbrahm ki lag sev. ॥ 1 ॥
Rukhmaangad Arjun jaan, Bhishm Dron sukh sanjey bakhaan.
Prahlad Pandav Amrish hoy, o bhi bhajyo nit Ram joy. ॥ 2 ॥
Parashar rish room jaan, Prithu saal jan Bharat maan.
Hans dhwaj jug roop soor, har gaay parsya Brahm noor. ॥ 3 ॥
Piplaad Hari Kivlaad hoy, rish rishabh dev avatar joy.
Jan ket dev Sukhdev jaan, sab samajhwaan bhaye leen aan. ॥ 4 ॥
राम नाम का भजन और उसकी सिद्धि
महाराज मन से उपदेश देते हैं — "राम नाम का निरंतर भजन करो,"
जिससे तेरे सभी मनोरथ (इच्छाएँ) और सभी कार्य सिद्ध हो जाएंगे। यह कोई साधारण नाम नहीं, बल्कि पारब्रह्म का निज नाम है,
जिसकी भक्ति देव, ऋषि और राजाओं ने भी की है। व्यासजी, श्रीकृष्ण, श्रीरामचन्द्रजी, ध्रुवजी, नारदजी, सनक, सनन्दन, सनातन, सनत्कुमार, यहाँ तक कि ब्रह्मा, विष्णु और महादेव भी पारब्रह्म के इस नाम की भक्ति करते हैं। रूखमांगद, महाबली अर्जुन, भीष्म पितामह,
द्रोणाचार्य, सुखदेवजी, संजय, प्रह्लाद, पांडव, राजा अम्बरीष — ये सब राम नाम के उपासक थे।पराशर ऋषि, लोमश ऋषि, राजा पृथु,राजा भरत, पिपलाद हरि, किवलाद ऋषि, ऋषभदेवजी तथा अन्य अवतार — इन सभी ने राम नाम में ही तन्मयता प्राप्त की।
महाराज अंत में कहते हैं: "इन सभी ने समझ-बूझकर, ज्ञान और श्रद्धा से, स्वयं को राम में लीन कर लिया है।"