Thursday, November 20, 2025

Pāṇḍe suṇ le bed hamāro पांडे सुण ले बेद हमारो_ हरजस पद राग आसा (२९) पांडे सुण ले बेद हमारो, जाकूं शेष महेशर बंछे, लगे शकल घट पियारो ॥ टेर ॥ भणणो भाव साध सुं राखुं, खिमया कका पढ लिया। सीधो सांच चित चरणायक, अरथ नांव दिल दिया ॥ १ ॥ प्रेम पुराण विरह व्याकरण, साजन मत संभाया। चारों वेद अगम की अणभै, जीव चेतावण आया ॥ २ ॥ कागद कलम एक नहीं चहिये, पाठो न पाटी स्याही। जन सुखराम दील दी भीतर, सतलोक गम पाई ॥ ३ ॥ Harjas Pad Rāg Āsā (29) Pāṇḍe suṇ le bed hamāro, jākũ Śeṣ Maheshar bañche, lage shakal ghaṭ piyāro. ṭer ॥ Bhaṇṇo bhāv sādh sũ rākhũ, khimyā kaka paḍh liyā. Sīdhō sā̃ch chit charaṇāyak, arth nāv dil diyā. ॥ 1 ॥ Prem Purān Virah vyākaraṇ, sājān mat sambhāyā. Chārō ved agam kī añbhai, jīv chetāvṇ āyā. ॥ 2 ॥ Kāgad kalam ek nahī̃ chahiye, pāṭhō na pāṭī syāhī. Jan Sukhārām dīl dī bhītar, satlok gam pāī. ॥ 3 ॥ पंडितों से महाराज फ़रमाते हैं कि हमारा ज्ञान सुन लो, जिस ज्ञान की शेषजी, महादेवजी भी इच्छा करते हैं और सबको अच्छा लगता है। सतशब्द की भक्ति करके केवली भगवंतों के अणभै ज्ञान से भाव रखना ही पढ़ना है। क्षमा धारण करना ही क का पढ़ना है। साँच धारण करना ही सीधा पढ़ना है। अणभै ज्ञान का चिंतन करना ही चरणों में पड़ना है। निज नांव में दिल लगाना ही अर्थ का समझना है। प्रेम व विरह से भक्ति करना ही पुराण व व्याकरण पढ़ना है। इस तरह का साधन करना ही मत संभालना है। अगम पद की केवली भगवंतों की अणभै वाणी बोलना ही, चारों वेदों का बखान करना है। इस तरह जीव को चेताने के लिये संत आये हैं। इस साधन में कागद, कलम, पाठो, पाटी, स्याही नहीं चाहिये। महाराज फ़रमाते हैं कि दिल के भीतर ही सतलोक का ज्ञान प्राप्त कर लिया है।

Mhaare paavna paramguru aaj म्हारे पावणा परमगुरु आज_ हरजस पद राग बधावा (१)

 म्हारे पावणा परमगुरु आज, संया आवो ओ।  म्हारे आया ओ हरि का जन आज, संया आवो ओ ॥ टेर ॥  आवो ओ गावो संया, आणंद बधावा।  म्हारे आंगणिये ओ साधां र...