Thursday, November 20, 2025

Sab suṁ nirsa hoy सब सुं निरसा होय_हरजस पद राग मंगल (१५) सब सुं निरसा होय, राम गुण गाइये। ज्युं तेरा रीजे श्याम, परमपद पाइये ।। १ ।। अहूं पद में दुख होय, नरक में दीजिये। बिन शिवरण करतार, परथ नहीं रिजीये ।। २ ।। परमेश्वर कूं जांण, संता कूं मानिये। हरि गुरु बिच अंतराय, कबू नहीं आनिये ।। ३ ।। जीव दया दिल राख, धरम सो कीजिये। मत कर डावा डोल, राम रस पीजिये ।। ४ ।। कसर कोर सब काड, भक्त सो कीजिये। तन मन धन सुखराम, गुरां कूं दीजिये ।। ५ ।। Harjas Pad Raag Mangal (15) Sab suṁ nirsa hoy, Ram gun gaiye. Jyuṁ tera rīje Shyam, parampad paiye. ॥ 1 ॥ Ahuṁ pad meṁ dukh hoy, narak meṁ dījiye. Bin shivran kartar, parath nahīṁ rijīye. ॥ 2 ॥ Parameshwar kūṁ jān, santa kūṁ māniye. Hari guru bich antarāy, kabū nahīṁ āniye. ॥ 3 ॥ Jeev daya dil rākh, dharam so kījiye. Mat kar dāvā dol, Ram ras pījiye. ॥ 4 ॥ Kasar kor sab kād, bhakt so kījiye. Tan man dhan Sukhram, gurāṁ kūṁ dījiye. ॥ 5 ॥ "सबसे छोटा बनकर परमात्मा का भजन करो, जिससे परमात्मा प्रसन्न होकर परमपद की प्राप्ति करा देंगे। अहंकार से दुख होगा और नरकों का दुख भोगना पड़ेगा। परमात्मा की भक्ति के बिना परमात्मा कभी प्रसन्न नहीं होंगे। संतों की बताई विधि के अनुसार भजन करना ही परमात्मा को जानना और संतों को मानना है। परमात्मा और सतगुरु, यानी केवली भगवंतों में भेद नहीं समझना चाहिए। सभी त्रिलोकी के जीवों पर दया कर सुख पहुँचाओ, यानी गृहस्थ में रहकर देव ऋण (दान), पितृ ऋण (परिवार के प्रति कर्तव्य कर्म), ऋषि ऋण (सांस-उसांस में ब्रह्म के नाम की भक्ति कर, रामरस पीता रह) चुकाओ। मन को डावांडोल मत करो और तन से रटन करो। मन का अपनत्व छोड़ स्वांसारूपी धन भक्ति में लगाओ, यही ज्ञान गुरुदेव को देना है।"

Mhaare paavna paramguru aaj म्हारे पावणा परमगुरु आज_ हरजस पद राग बधावा (१)

 म्हारे पावणा परमगुरु आज, संया आवो ओ।  म्हारे आया ओ हरि का जन आज, संया आवो ओ ॥ टेर ॥  आवो ओ गावो संया, आणंद बधावा।  म्हारे आंगणिये ओ साधां र...