Thursday, November 20, 2025

Santo bhāī gṛhasth bhev batāūṁ संतो भाई गृहस्थ भेव बताऊं_हरजस पद राग दीपचन्दी (२) संतो भाई गृहस्थ भेव बताऊं, न्याव छांण सत गाऊं ।। टेर ॥ ब्यायर का गुण सोज दाखूं, सुण लिज्यो सब कोई। दूध दही घी गोरस बछियो, सुख पावे सब लोई ॥ १ ॥ सुर नर मुनी जंगम जोगी, रिष हरिजन कुवावे। वे गृहस्थ शकल कूं पूजे, सारा के गुण आवे ॥ २ ॥ लडका लडकी पुतर जन्मे, तामें यह फल होई। हर की भगत करे जो सूरो, सब कुल तारे लोई ॥ ३॥ लडकी ब्याव धरम कर देवे, फेर भगत हुवे दासा। जन सुखराम इसा गृहस्थ रे, त्याग जत सत से आछा ॥ ४ ॥ Harjas Pad Raag Deepchandi (2) Santo bhāī gṛhasth bhev batāūṁ, nyāv chhāṇ sat gāvūṁ. ṭer ॥ Byārar kā guṇ soj dākhūṁ, suṇ lijyo sab koī. Dūdh dahī ghī gors bachiyo, sukh pāve sab loī. ॥ 1 ॥ Sur nar munī jangam jogī, rish harijan kuvāve. Ve gṛhasth shakal kūṁ pūje, sārā ke guṇ āve. ॥ 2 ॥ Laḍkā laḍkī putar janme, tāme yah phal hoī. Har kī bhagat kare jo sūrō, sab kul tāre loī. ॥ 3 ॥ Laḍkī byāv dharam kar deve, pher bhagat huve dāsā. Jan SukhRam isā gṛhasth re, tyāg jat sat se āchhā. ॥ 4 ॥ संतों से महाराज फरमाते हैं:"अब मैं गृहस्थियों का भेद बताता हूँ — न्याय करके, सत बात कहता हूँ।सुणो सब कोई — व्याई हुई गाय के गुण होते हैं — उससे दूध, दही, घी, छाछ और बछिया की प्राप्ति होती है, जिससे सबको सुख होता है।देवता, मनुष्य, मुनि, जंगम, योगी, ऋषि, संत — सभी गृहस्थ की सेवा से सुख प्राप्त करते हैं। यही गुण होना चाहिए।गृहस्थ के लड़के-लड़कियाँ यदि शूरवीरता धारण करके भजन करते हैं, तो पूरा कुल उद्धार को प्राप्त होता है।लड़की का धर्म — सदाचार से विवाह करना, और दास-भाव से भक्ति करना है। महाराज अंत में फरमाते हैं: "ऐसे गृहस्थी, त्यागी, जती और सती से भी श्रेष्ठ होते हैं।" संतो से महाराज फरमाते हैं कि मैं गृहस्थियों का भेद बताता हूं न्याव करके सत बात कहता हूं। व्याई हुई गाय के गुण होते है। सब कोई सुणो दूध, दही, घी, छाछ व बछिया की प्राप्ति होती है। इससे सबको सुख होता है। देवता मनुष्य मुनि जंगम जोगी रिषी संत सबकी गृहस्थ सेवा करके सुख पहुंचाते है। यही गुण आना है। गृहस्थियों के लडका लडकी होते है वे शूरवीरता धारण कर भजन करते है तो कुल का उद्धार हो जाता है। लडकी का धर्म ब्याव करते है और दास भाव रखकर भक्ति करते है। महाराज फरमाते हैं कि ऐसे गृहस्थी त्यागियो जतीयो व सतीयो से अच्छे है।

Mhaare paavna paramguru aaj म्हारे पावणा परमगुरु आज_ हरजस पद राग बधावा (१)

 म्हारे पावणा परमगुरु आज, संया आवो ओ।  म्हारे आया ओ हरि का जन आज, संया आवो ओ ॥ टेर ॥  आवो ओ गावो संया, आणंद बधावा।  म्हारे आंगणिये ओ साधां र...