Thursday, November 20, 2025
Santo tyāgn bhev batāūṁ सन्तो त्यागन भेव बताऊं_ हरजस पद राग दीपचन्दी (१)
सन्तो त्यागन भेव बताऊं, आद अंत मध ले गावं ॥ टेर ॥
कासी सांड रह गायां में, कोहो कहा फल लेवे। तोडे बाड खेत वो खावे, दुनिया कूं दुख देवे ॥ १ ॥
बांज गाय सो कदे न ब्यावे, तामें क्या गुण होई। चारो खावे गोबर न्हाके, यूं दुख पावे लोई ॥ २ ॥
फूल फलां बिन बरछ बडो, ता पात न लागे। काठ ताको असो कोमल, घडत घडत जूं भांगे ॥ ३ ॥
चीना पिया बिना सब मर जावे, क्या बांज क्या ब्याई। जन सुखराम काल में दुनियां, किसकूं नीरे लाई ॥ ४ ॥
Harjas Pad Raag Deepchandi (1)
Santo tyāgn bhev batāūṁ, ād ant madh le gāvūṁ. ṭer ॥
Kāsī sāṇḍ rah gāyāṁ meṁ, koho kahā phal leve. Toḍe bāḍ kheṭ vo khāve, duniyā kūṁ dukh deve. ॥ 1 ॥
Bāñj gāy so kade na byāve, tāme kyā guṇ hoī. Chāro khāve gobar nhāke, yūṁ dukh pāve loī. ॥ 2 ॥
Phūl phalāṁ bin barach baḍo, tā pāt na lāge. Kāṭh tāko aso komal, ghaḍat ghaḍat jūṁ bhāṅge. ॥ 3 ॥
Chīnā piyā binā sab mar jāve, kyā bāñj kyā byāī. Jan SukhRam kāl meṁ duniyāṁ, kiskūṁ nīre lāī. ॥ 4 ॥
महाराज संतो से फरमाते हैं:"अब त्यागियों का आदि, मध्य और अंत का भेद समझो।जैसे — कोई सांड यदि बैल बनकर गायों के साथ रहे,
लेकिन वह गायों को फलाता नहीं है, खेत की बाड़ तोड़ता है, फसल को खा जाता है — तो समझो, उसका होना दुख देने वाला है।
बांझ गाय — ना वह कभी ब्याती है, ना दूध-दही-मक्खन देती है, फिर भी घास खाती है, और उसका गोबर उठाना पड़ता है — यही दूसरों पर भार बनना है।एक वृक्ष बहुत बड़ा है, लेकिन उसमें फल-फूल-पत्ते कुछ भी नहीं आते, और लकड़ी भी इतनी कोमल होती है कि कोई चीज़ बनाते समय टूट जाती है — तो वह निष्फल जीवन का प्रतीक है।ऐसे ही यदि कोई त्यागी हो या गृहस्थी, लेकिन सतशब्द की प्राप्ति नहीं करता, तो वह जन्म-मरण के चक्र में फँसता रहेगा। इसी को कहते हैं — "चीना पिया बिना सब मर जावे हैं।"महाराज आगे फरमाते हैं:
"यदि स्वयं काल पड़ जाए, तो खुद का ही गुज़ारा मुश्किल हो जाता है, तो वह दूसरों की सेवा क्या करेगा?अर्थात, जब आत्मा यमराज के फंदे में पड़ जाती है, तब उसे कोई भी नहीं छुड़ा सकता।"
संतो से महाराज फरमाते हैं कि त्यागियो का आदि अन्त व मध्य का भेद बताता हूं। केसी किया हुवा सांड गायो में रहता है तो वह गायो को नहीं फलाता है। खेत की बाड तोडता है और खेत खा जाता है। यही दुनिया को दुख देना है। बांझ गाय कभी नहीं ब्याती है और उसके दूध दही मक्खन नहीं होता है व घास खाती है और उल्टा उसका गोबर उठाना पडता है, यही दुख देना है। वृक्ष तो बहुत बडा है परन्तु उसके फल फूल पते कुछ भी नहीं आते है व लकडी भी ऐसी कोमल होती है जो चीज बनाते बनाते टूट जाती है। मनुष्य जन्म धारण करने के बाद चाहे त्यागी हो, चाहे गृहस्थी हो, अगर यह सतशब्द प्राप्त नहीं किया तो जन्म मरण में आना पडेगा। यही चीना पिया बिना सब मर जावे है। महाराज फरमाते हैं कि अगर काल पड जाता है तो खुद का गुजारा भी नहीं होता है तो वे दूसरो की सेवा कैसे कर सकते है। अर्थात जब आत्मा जमराज जी के फंदे में पड जायेगी तब इसको कोई नहीं छूडा सकता है।
Mhaare paavna paramguru aaj म्हारे पावणा परमगुरु आज_ हरजस पद राग बधावा (१)
म्हारे पावणा परमगुरु आज, संया आवो ओ। म्हारे आया ओ हरि का जन आज, संया आवो ओ ॥ टेर ॥ आवो ओ गावो संया, आणंद बधावा। म्हारे आंगणिये ओ साधां र...
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हेली ए आज पूनम वाली रात, चालोनी सतसंग में ।।टेर।। हेली ए सतगुरु मिलिया दयाल, भिगोय दिनी रंग में। हेली ए चालोनी गुरांसा री हाट, ज्ञ...
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नमो नमों गुरूदेव, परम निज भेव बताया। निर्गुण ज्ञान विचार, हंस परम हंस कुवाया ॥ नमों नमों गुरूदेव, समुद्र में डुबत तारया । नमों न...