Thursday, November 20, 2025

Santo vo suṇ kāraṇ nāhī̃ संतो वो सुण कारण नांही_ हरजस पद राग आसा (३२) संतो वो सुण कारण नांही। भावे त्याग आज कर निकसो, भावे रहो घर मांही ॥ टेर ॥ माहा बैराग ऊपनो हो छिन में, जंगल की राह धावे। तां दिन त्याग करे नर असो, देह तज्या हंस जावे ॥ १ ॥ मन सुलजाय कियो जब न्यारो, अडबी रह न कांई। ऐसो ज्ञान महारस पाया, भेल्यो भिले न मांही ॥ २ ॥ मथ घिरत करत जुग न्यारो, कास्ट आग प्रकाशा। दूध यूं मथ ज्ञान बिरच नर बैठो, तजि ब्रह्म लग आसा ।। ३ ॥ मात पिता सुत नार कुलन्तर, जुग जुग बोह संग किना। दिन दस सुलझ समझ ढींग बैठो, अंत छाड सब दिना ॥ ४ ॥ आवागमन मिटाई चावो, माहापरम सुख लिजे। कह सुखराम नांव तज करता, सत नांव चित दिजे ॥ ५ ॥ Harjas Pad Rāg Āsā (32) Santo vo suṇ kāraṇ nāhī̃. Bhāve tyāg āj kar nikso, bhāve raho ghar mā̃hī. ṭer ॥ Māhā bairāg ūpno ho chhin mẽ, jaṅgal kī rāh dhāve. Tā̃ din tyāg kare nar aso, deh tajyā hans jāve. ॥ 1 ॥ Man suljāy kiyo jab nyāro, aḍbī rah na kā̃ī. Aiso gyān mahāras pāyā, bhelyo bhile na mā̃hī. ॥ 2 ॥ Math ghirat karat jug nyāro, kāsṭ āg prakāśā. Dūdh ū̃ math gyān birach nar baitho, tajī Brahm lag āsā. ॥ 3 ॥ Māt-pitā sut nār kulantar, jug jug boh sang kinā. Din das sulajh samajh ḍhīṅg baitho, ant chhāḍ sab dinā. ॥ 4 ॥ Āvāgaman miṭāī chāvo, māhāparam sukh lije. Kah Sukharām nām taj kartā, sat nām chit dije. ॥ 5 ॥ संतों से महाराज फ़रमाते हैं कि इसका कोई कारण नहीं है, चाहे घर में रहो, चाहे त्याग कर जाओ। जिस तरह महा बैराग उपजता है तो घर को छोड़कर जंगल की तरफ चला जाता है। मृत्यु आने पर सभी इस शरीर को छोड़ देते हैं, लेकिन वह त्याग श्रेष्ठ है जो जीते जी शरीर को छोड़कर केवल पद आनंद पद की प्राप्ति हो जाती है। संसार में रहते हुए इससे मोह व आपा नहीं रखता है तो किसी प्रकार की अडबी नहीं रहती है। वह संसार के साथ में रहता हुआ भी अलग है। इस तरह सतशब्द का ज्ञान प्राप्त होने पर शरीर में रहते हुए भी शरीर से अलग है। दूध मथकर घी को अलग करते हैं। काष्ठ मथने से आग प्रगट हो जाती है। ऐसे ही सतस्वरूप आनंद पद का ज्ञान धारण करके ब्रह्म पद तक के ज्ञान को छोड़ दिया। माता, पिता, लड़का, स्त्री, कुटुम्ब जिस जिस योनि में गये वही मिले। इनके साथ में रहते हुए भी आपा व मोह छोड़ना ही इनको छोड़ना है। जन्म-मरण से रहित होना चाहते हो तो केवल पद आनंद पद की प्राप्ति करो। महाराज फ़रमाते हैं कि करता, यानी आधार का जो नाँव है, इसको छोड़कर सत नाँव, यानी निराधार निज नाँव की भक्ति करो।

Mhaare paavna paramguru aaj म्हारे पावणा परमगुरु आज_ हरजस पद राग बधावा (१)

 म्हारे पावणा परमगुरु आज, संया आवो ओ।  म्हारे आया ओ हरि का जन आज, संया आवो ओ ॥ टेर ॥  आवो ओ गावो संया, आणंद बधावा।  म्हारे आंगणिये ओ साधां र...