Thursday, November 20, 2025

Tum bina mera naanh jug mein तुम बिना मेरा नांह जुग में_ हरजस पद राग मिश्रीत (१५) तुम बिना मेरा नांह जुग में, भावे मारर तार। प्रभुजी हो सुणज्यो, हो मेरी पुकार ।। टेर ।। नेणा नींद न संच रे हो, अंतर ऊंडी मार। शब्द कलेजे छेद पडियो, बेदन बूझण हार ।। १ ।। वेद जोशी रोग नां जाणे, शरण तुमारी आवियो, दुजा सब त्याग्या। सब जग दिशे थोथरो, तुम सूं चित लाग्या ।। २ ।। भावे बन में राखज्यो, भावे गरह जागा। भावे करज्यो अकेलो, भावे बोहो सागा ।। ३ ।। Harjas Pad Raag Mishrit (15) Tum bina mera naanh jug mein, bhaave maarar taar. Prabhuji ho sunjyo, ho meri pukaar. ॥ Ter ॥ Nena neend na sanch re ho, antar oondi maar. Shabd kaleje ched padiyo, bedan boojhan haar. ॥ 1 ॥ Ved joshi rog naan jaane, sharan tumari aaviyo, duja sab tyaagya. Sab jag dishe thotharo, tum soon chit laagya. ॥ 2 ॥ Bhaave ban mein raakhjyo, bhaave garah jaaga. Bhaave karjyo akelo, bhaave boho saaga. ॥ 3 ॥ आत्मा परमात्मा से प्रार्थना करती है:हे परमात्मा! इस जगत में आपके बिना मेरा कोई नहीं है। चाहे आप मुझे मारो या तारो, पर मेरी प्रार्थना तो सुनो। यही "सुणज्यो मेरी पुकार है" — मेरी अंतर की आह है।मेरी आंखों में नींद नहीं आती, क्योंकि आपकी प्राप्ति न होने से अंतर में गहरा दुख बना हुआ है।हृदय में यही चिंता लगी है कि यदि परमात्मा की प्राप्ति नहीं हुई, तो नरक और चौरासी लाख योनियों का दुख सहना पड़ेगा।इस दुख को कोई नहीं जानता। न वेद, न जोशी, न झाड़ा-झपट्टा देने वाले लोग मेरे इस रोग — आत्मिक पीड़ा — को समझ सकते हैं।अब मैंने सबको छोड़कर केवल आपकी शरण ली है। चाहे आप मुझे अकेला रखो, या बहुत परिवार के साथ, मैं आपका ही हूं।सारा जगत अब मुझे सूना लग रहा है, और मेरा चित्त आपके चरणों में लग गया है।आप चाहे मुझे घर में रखो या वन में, मेरे लिए अब सब एक समान है। क्योंकि आप ही मेरे प्रिय, सहारा और लक्ष्य हो। आत्मा परमात्मा से प्रार्थना कर रही है कि जगत में आपके बिना मेरा कोई नहीं है। चाहे आप मुझे मैं मारो व तारो, मेरी प्रार्थना सुणो, यही सुणज्यो मेरी पुकार है। आंखो में नींद नहीं आती, अन्तर आपकी प्राप्ति नहीं होने से बहुत दुख है। हृदय में यही दुख हो रहा है कि परमात्मा की प्राप्ति नहीं पर नरक व चौरासी का दुख भोगना पडेगा। इस दुख को कोई नहीं जानता है। वेद व जोशी होने याने झाडा झपटे देने वाले मेरे रोग को नहीं जानते। मैं तो सबको छोडकर आपकी शरण में आया अकेला कर दो या बहोत परिवार के साथ रखो। हूं। सारा जगत सुना दिख रहा है। मेरा चित आप में लग रहा है। चाहे आप घर में रखो या बन मैं रखो, चाहे आप

Mhaare paavna paramguru aaj म्हारे पावणा परमगुरु आज_ हरजस पद राग बधावा (१)

 म्हारे पावणा परमगुरु आज, संया आवो ओ।  म्हारे आया ओ हरि का जन आज, संया आवो ओ ॥ टेर ॥  आवो ओ गावो संया, आणंद बधावा।  म्हारे आंगणिये ओ साधां र...