Friday, August 29, 2025

Aasha taj niraas hoi आशा तज निरआस होई_ हरजस पद राग बिलावल (१४)

 

आशा तज निरआस होई, भक्ति नर कीजे। तीन लोक सुख छोड के, चरणा चित दीजे ।। टेर ।। 

सपना ज्यूं सुख जग का, मत भूलो कोई। माया ठगनी लार है, मत डूबो लोई ।। १ ।।

 बश माया के जोर है, नाना विध घाता। शिवरण बिना संसार में, माया की बाता ।। २ ।। 

ब्रह्म ज्ञान मत धार के, साहिब कूं गावे। ज्यूं सुखदेव जम सब थके, अमरापुर पावे ।। ३ ।। 

Harjas Pad Raag Bilawal (14)

Aasha taj niraas hoi, bhakti nar kije. Teen lok sukh chhod ke, charna chit dije. (Ter)

Sapna jyu sukh jag ka, mat bhulo koi.

Maaya thagni laar hai, mat doobo loi. ॥1॥

Bash maaya ke jor hai, naana vidh ghaata.

Shivran bina sansaar mein, maaya ki baata. ॥2॥

Brahm gyaan mat dhaar ke, sahib koon gaave.

Jyu Sukhdev jam sab thake, Amarapur paave. ॥3॥

"किसी भी प्रकार की इच्छाएँ न रखकर भक्ति करना ही 'आशा तज निराश होना' है। तीनों लोकों के सुख की इच्छा को छोड़कर परमात्मा की भक्ति में चित्त लगाओ। तीनों लोकों का सुख सपने के सुख के बराबर है, इसमें कोई भ्रमित न हो। माया रूपी ठगिनी साथ है, इसका मोह करके मत डूबो। सब माया के वश में हैं, वह अनेक प्रकार से फँसाती है, यही घात है। एक भजन के बिना जगत में सब माया का पसारा है, सतगुरु विधि से सतशब्द की भक्ति करना ही 'ब्रह्म ज्ञान मत धारना' है। सतशब्द का ध्यान करना ही 'साहिब कूं गाना' है। महाराज फ़रमाते हैं कि सतशब्द की भक्ति से जन्म-मरण से रहित होना ही 'जम का थकना' है और आनंद पद की प्राप्ति करना ही 'अमरापुर पाना' है।"


Mhaare paavna paramguru aaj म्हारे पावणा परमगुरु आज_ हरजस पद राग बधावा (१)

 म्हारे पावणा परमगुरु आज, संया आवो ओ।  म्हारे आया ओ हरि का जन आज, संया आवो ओ ॥ टेर ॥  आवो ओ गावो संया, आणंद बधावा।  म्हारे आंगणिये ओ साधां र...