Wednesday, September 3, 2025

Aayo Mosar Mati Haaro_आयो मोसर मति हारो_Harjas Pad Raag Asa (18)



आयो मोसर मति हारो। जां संग हंस अगम घर पहुंचे, वे सतगुरु शिर धारो ॥ टेर ॥

बांदा जग को हेत सकल दुख दायक, जां संग सुख मती जाणो।
सुख दायक सत संगत जग में, सतगुरु शरण पिछाणो ॥ १ ॥

मात पिता सुत गोत कडूंबो, जूण जूण संग होई।
मिनखा देह गुरु बोह पासो, सतगुरु मिले न कोई ॥ २ ॥

चार दिना की जोर जवानी, आ देखन मत भूलो।
आ देसी दगो इणी काया में, जुग जुग दुख संग झूलो ॥ ३ ॥

तीन लोक लग माया कीची, और सगत लग भाई।
जां लग ज्ञान तिके सब काचा, मती मानो जग मांई ॥ ४ ॥

कह सुखराम मान नर मेरी, नेः अँच्छर गम लिजे।
फाडर पीठ चढे गढ ऊपर, बोहोर न जूण धरिजे ॥ ५ ॥

मन से महाराज फ़रमाते हैं कि मनुष्य जन्म मिला है, इस अवसर को व्यर्थ मत गँवाओ। जिस सतगुरु के अणभै ज्ञान द्वारा  केवल पद की प्राप्ति होती है, उन सतगुरु का अणभै ज्ञान धारण करो। संसार का मोह दुःख देने वाला है, उसके साथ सुख मत समझो। सतपद का ज्ञान सुख देने वाला है, उसको सतगुरु याने संतों के निरपेक्ष निर्णय की संगत से प्राप्त करो। माता, पिता, गोती, कुटुम्बी तो जिस जिस योनि में जावेंगे, वहाँ सभी जगह मिलते रहेंगे। मनुष्य जन्म शरीर, इन्द्रिया, स्वाँसा, मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार व वाणी के आधार से साधन बताने वाले गुरु तो बहुत मिलेंगे, लेकिन परमात्मा के निज नाँव याने सतशब्द का निरपेक्ष अणभै ज्ञान देने वाले संत नहीं मिलेंगे। यह जवानी चार दिनों की रहने वाली है, उसको देखकर परमात्मा को मत भूलो। देखते-देखते इस शरीर से जवानी चली जायेगी और बुढ़ापा आ जायेगा। भक्ति नहीं करने पर नरकों में व चौरासी का दुख भोगना पड़ेगा। तीन लोक व शक्ति लोक तक का ज्ञान सेल-भेल है। वहाँ तक के ज्ञान माया के हैं, उसको तुम मत मानो। महाराज फ़रमाते हैं कि मेरी मानकर नेः अँच्छर का अणभै ज्ञान धारण करो, जिससे पीठ के रास्ते बंकनाल से होकर खण्ड, पिण्ड, ब्रह्माण्ड व पारब्रह्म से ऊपर केवल पद  की प्राप्ति करो व जन्म-मरण से रहित हो जाओ।

 

जीवात्मा ने अपना पहला कर्म (गलती) कहाँ किया था?सबसे पहली बार उस 'आदि पुरुष' (परमात्मा/ब्रह्म) से बिछड़ी थी, तब तो संसार था ही नहीं

हरजस पद राग मिश्रीत (५)   संत सुखराम जी महाराज का यह हरजस अत्यंत तार्किक, दार्शनिक और सुरति-शब्द योग के सबसे बड़े रहस्य का उद्घाटन करने व...