Friday, August 29, 2025

Bhev batavjyo, samrath Guru mera भेव बतावज्यो, समरथ गुरु मेरा_ हरजस पद राग बिलावल (११) 270325


 भेव बतावज्यो, समरथ गुरु मेरा। राम मिलो इण देह में, काटुं विष जेरा ।। टेर ।।

 असा कुदरत तेरी सांईयां, मुज लखी न जावे। मो मन असी ऊपजे, कैसे हर पावे ।। १ ।। 

देह अस्तुल ना रूप के, घर गांव न काया। किस विध मेला कीजिए, तिरभवन पत राया ।। २ ।।

 पूरब प्रीत पिछाण के, मेरे घर आवो। मैं दुखिया तुम बाहिरा, मुज दरश दिखावो ।। ३ ।।

 मैं निर्बल बल हीण हूं, मुज सजे न कांई। शरणागत सुखराम है, हर मिलो मन मांई ।। ४ ।।

Harjas Pad Raag Bilawal (11) 270325

Bhev batavjyo, samrath Guru mera. Ram milo in deh mein, kaatun vish jera. (Ter)

Asa kudrat teri saaiyaan, muj lakhi na jaave.

Mo man asi oopje, kaise har paave. ॥1॥

Deh astul na roop ke, ghar gaanv na kaaya.

Kis vidh mela kijiye, tirbhavan pat raaya. ॥2॥

Poorab preet pichhaan ke, mere ghar aavo.

Main dukhiya tum baahira, muj darash dikhaavo. ॥3॥

Main nirbal bal heen hun, muj saje na kaain.

Sharanagat Sukhram hai, har milo man maain. ॥4॥

हे परमात्मा और सतगुरु, यानी केवली भगवंतो, मुझे ऐसा भेद बताओ जिससे इस शरीर में ही परमात्मा की प्राप्ति हो जाए और मैं जन्म-मरण से रहित हो जाऊँ, यही कटु विष का निवारण है। परमात्मा, आपकी कला मेरी समझ में नहीं आती। मेरे मन में यह भाव होता है कि परमात्मा की प्राप्ति कैसे करूँ। तीनों लोकों के स्वामी, आपका स्थूल शरीर नहीं है। न आपका कोई रूप-रंग है, न घर-गाँव है, आपकी प्राप्ति कैसे होगी? आदि-प्रेम को पहचानकर मेरे अंतर में प्रकट होओ। आपकी प्राप्ति के बिना मैं दुखी हूँ। मुझे दर्शन दो, मैं कमजोर और बलहीन हूँ। मुझसे आपकी भक्ति नहीं होती है, मैं आपकी शरण में हूँ। आपका ज्ञान हर समय मन से होता रहे।"


Mhaare paavna paramguru aaj म्हारे पावणा परमगुरु आज_ हरजस पद राग बधावा (१)

 म्हारे पावणा परमगुरु आज, संया आवो ओ।  म्हारे आया ओ हरि का जन आज, संया आवो ओ ॥ टेर ॥  आवो ओ गावो संया, आणंद बधावा।  म्हारे आंगणिये ओ साधां र...