हंस चल्या घर आपणे, मत रोवो भाई। ज्यां वां सूं यां भेजिया, त्यां लिया बुलाई ।। टेर ।।
खेल मंडयो बाजार में, सब जोवण जावे। देख तमासो फिर चले, नट क्यूं पिस्तावे ।। १ ।।
राछ माल थाथी घरे, बस्ते नर माया। आंण संभाले ले चले, क्यूं बेदल भाया ।। २ ।।
सांपे नाम सांड का होवे, सांपे गायां संग चरे सब ग्वाल चरावे। धणी बिछोडे आंण के, क्यों ग्वाल ढिरावे ।। ३ ।।
मेला में सुखराम कह, सब ही चल आवे। लेबा देबा कोगती, फिर पीछा जावे ।। ४ ।।
Harjas Pad Raag Bilawal (12) 010425
Hans chalya ghar aapne, mat rovo bhai. Jyaan vaan soon yaan bhejiya, tyaan liya bulaai. (Ter)
Khel mandyo bazaar mein, sab jovan jaave.
Dekh tamaso phir chale, nat kyon pistaave. ॥1॥
Raach maal thaathi ghare, baste nar maaya.
Aan sambhaale le chale, kyon bedal bhaaya. ॥2॥
Saanpe naam saand ka hove, saanpe gaayaan sang chare sab gvaal charaave.
Dhani bichhode aan ke, kyon gvaal dhiraave. ॥3॥
Mela mein Sukhram kah, sab hi chal aave.
Leba deba kogati, phir peecha jaave. ॥4॥
"हंस शरीर छोड़ता है, यही घर जाना है, उसके लिए मत रोओ। जिस परमात्मा ने भेजा, उसी ने ही बुला लिया। बाजार में खेल होता है, उसे देखने सब जाते हैं, तमाशा देखकर वापस घर जाते हैं, तो नट कहाँ पछताता है? कोई चीज गिरवी रखकर वापस छुड़ाता है, तो गिरवी रखने वाला कहाँ दुख पाता है? जिसकी होती है, वह ले जाता है। गायों के झुंड में सभी गायें चरती हैं, ग्वाला चराता है, जब उन्हें उनका मालिक ले जाता है, तब ग्वाला कहाँ दुख पाता है? महाराज फ़रमाते हैं कि मेला भरने पर सभी इकट्ठे होते हैं, कोई लेने वाले, कोई देने वाले आते हैं, और कोई देखने आते हैं, सभी अपना काम करके वापस अपने घर जाते हैं, तब किसे दुख होता है?"