हंसा छाडोनी जग को नेह, जगत सुं तोडिये। सतगुरु सुं कर हेत, सायब दिश जोड़िये ।। १ ।।
विष प्याला सब छाड, अमी रस पीजिये। तन मन दिल को सांच, सायब कूं दीजिये ।। २ ।।
मान हमारी बात, कहूं समजाय बो। ओ मोसर दिन आज, बोहर नहीं पायबो ।। ३ ।।
अबके चुकयो डाव, घणो पिस्तावसी। लख चौरासी के मांय, मार बोह खावसी ।। ४ ।।
समझ समझ मन मांय, भजन सुं लागिये। काल भंवे शिर तोय, नींद सुं जागिये ।। ५ ।।
चेते क्यूंनी गिंवार, ज्ञान सुण जोईये। कह सुखदेवजी तोय, जन्म क्यूं खोइये ।। ६ ।।
Harjas Pad Raag Mangal (10)
Hansa chhaadoni jag ko neh, jagat soon todiye.
Satguru soon kar het, saayab dish jodiye. || 1 ||
Vish pyaala sab chhaad, amee ras peejiye.
Tan man dil ko saanch, saayab koon dijiye. || 2 ||**
Maan hamaari baat, kahoon samjhaay bo.
O mosar din aaj, bohar nahin paaybo. || 3 ||**
Abke chukyo daav, ghano pistaavsi.
Lakh chaurasi ke maay, maar boh khaavsi. || 4 ||**
Samajh samajh man maay, bhajan soon laagiye.
Kaal bhave shir toy, neend soon jaagiye. || 5 ||**
Chete kyunni ginvaar, gyaan sun joieye.
Kah Sukhdevji toy, janm kyun khoiye. || 6 ||
हंसों को महाराज फरमाते हैं कि जगत का प्रेम छोड़कर संसार से मोह छोड़ो। सतगुरु से प्रेम कर परमात्मा की भक्ति करो। विषयों से अलग होकर परमात्मा की भक्ति , भजन रूपी अमृत पीजिए । तन, मन और दिल की सच्चाई साहिब को दीजिये । मैं समझाकर कहता हूँ कि मेरी बात मानो, मनुष्य जन्म का अवसर बार-बार नहीं मिलेगा। इस जन्म में परमात्मा की प्राप्ति नहीं हुई तो पीछे पछताना पड़ेगा। चौरासी लाख योनियों में जन्म लेने और मरने का दुख भोगना ही पड़ेगा । मन में समझकर राम जी का भजन करो। काल रात दिन सिर पर चक्कर खा रहा है। भ्रम, अज्ञान और माया का मोह छोड़, नींद से जागिये। महाराज फरमाते हैं कि हे मूरख, ज्ञान सुनकर क्यों नहीं चेतता? मनुष्य जन्म व्यर्थ क्यों गंवाता है?