रे मन हर सुं डरप, नीच नहीं फूलिये। जिण कियो जुग तोय, ताय मत भूलिये ।। १ ।।
तारयां तिरणो होय, मारयां मर जाइये। वा शिमरथ को छोड, और नहीं गाइये ।। २ ।।
पल में करदे राव, निमक में रंक रे। वा शमरथ की बात, मान तूं संक रे।। ३ ।।
मैं कहूं तोय समझाय, मद नहीं राखिये। कह सुखदेवजी तोय, गरीबी दाखिये ।। ४ ।।
Harjas Pad Raag Mangal (11)
Re man har soon darap, neech nahin phooliye.
Jin kiyo jug toy, taay mat bhooliye. || 1 ||
Taarayaan tirno hoy, maaryaan mar jaiye.
Wa shimarth ko chhod, aur nahin gaaiye. || 2 ||**
Pal mein karde raav, nimak mein rank re.
Wa shamarth ki baat, maan toon sank re. || 3 ||**
Main kahoon toy samjhaay, mad nahin raakhiyo.
Kah Sukhdevji toy, gareebi daakhiyo. || 4 ||
हे मूरख मन, परमात्मा से डर। तू क्यों फूल रहा है? जिसने तेरे को और संसार को रचाया, उसको क्यों भूल रहा है? परमात्मा के उद्धार करने से उद्धार होता है और मारने से मरना पड़ता है। उस सिमरन करने योग्य राम जी को छोड़कर दूसरों की भक्ति नहीं करनी चाहिए। वह परमात्मा क्षण में राजा और क्षण में रंक बना देता है। उस परमात्मा का तू डर मान। मैं तुझको समझाकर कहता हूँ कि घमंड मत रख। महाराज फरमाते हैं कि तू गरीबी भाव धारण कर।