Friday, August 29, 2025

Jaamo hai bhaari hai bhaari जामो है भारी है भारी_हरजस पद राग जेत श्री (१)

 

 जामो है भारी है भारी, कोई धोवे संत हजारी, जामो है भारी है भारी ।। टेर ।। 

ज्यां धोयां ज्यां अमर हुवा रे, आवागमण निवारी। सुर तेतीस शकल सोई बंछे, मिलणो दुरलभ विचारी ।। १ ।। 

जामा मांय अनंत गुण होई, जे कोई लेहेत विचारी। गेली जगत धोय नहीं जाणे, उलटो कियो खुवारी ।। २।। 

कर सुं धुपे न लाता खुंधो, पायण शिला पिछाडी। जिण धोया जिण अधरज धोया, प्रेम नांव जल डारी ।। ३ ।। 

जल सुं धुपे न साबुन दिया, कीमत कठिन करारी। मुन्या तपस्या सिद्धा पीरा, धोयो नहीं लिगारी ।। ४ ।। 

धोबी कोट निनाणु कसिया, बाल जाल गया फाडी। अनन्त कोट संता सो धोयो, कसर न भागी सारी ।। ५ ।। 

पांचो ज्ञान तिरथंगर पाया, कर गया फगल विचारी। जन सुखराम धोवणे लागा, करडो मतो उर धारी ।। ६ ।। 

Harjas Pad Raag Jet Shri (1)

Jaamo hai bhaari hai bhaari, koi dhove Sant Hazaari, jaamo hai bhaari hai bhaari. (Ter)

Jyaan dhoya jyaan amar huwa re, aavagamann nivaari.

Sur tetis shakal soi banche, milno durlabh vichaari. ॥1॥

Jaama maay anant gun hoi, je koi lehat vichaari.

Geli jagat dhoye nahi jaane, ulto kiyo khuvaari. ॥2॥

Kar sun dhupe na laata khundho, paayan shila pichaadi.

Jin dhoya jin adharaj dhoya, prem naav jal daari. ॥3॥

Jal sun dhupe na saabun diya, keemat kathin karaari.

Munyaa tapasya siddha peera, dhoyo nahi ligaari. ॥4॥

Dhobi kot ninaanu kasiya, baal jaal gaya faadi.

Anant kot santa so dhoyo, kasar na bhaagi saari. ॥5॥

Paancho gyaan tirathangar paaya, kar gaya phagal vichaari.

Jan Sukhram dhovne laaga, karado mato ur dhaari. ॥6॥


"आत्मा ने मनुष्य शरीर रूपी जामा पहन रखा है, यह जामा भारी है। इस जामे को हजारों संत धो रहे हैं। जिन्होंने धो लिया है, वे जन्म-मरण से रहित होकर अमर हो गए हैं। तैंतीस करोड़ देवता मनुष्य शरीर पाने की इच्छा करते हैं, परन्तु मिलना मुश्किल है। इस जामे में अनंत गुण हैं, यदि इसका विचार करें तो जाना जाता है। संसार पागल है, वह इस जामे को धोना नहीं जानता, उल्टा खराब कर दिया। यह जामा न हाथ से, न पैर से रगड़ने से, न पत्थर पर पटकने से धुलता है। अर्थात दान से, तीर्थ यात्रा से, शरीर को कष्ट देने से नहीं धुलता है। जिन्होंने धोया है, उन्होंने इसको प्रेम से भजन करके सतशब्द का अधर अनुभव करके धोया है। न जल से, न साबुन से धुलता है अर्थात व्यर्थ की बड़ी-बड़ी बातें करने से, आठ अंग चौंसठ लक्षण शुद्ध रखने से भी नहीं धुलता। इसकी कीमत कठिन और करारी है। मुनि, तपस्वी, सिद्ध और पीर अपने-अपने साधन करके जरा सा भी नहीं धो सके। इस जगत में अपने-अपने मतानुसार निन्यानवे प्रतिशत लोगों ने इस जामे को धोने की कोशिश की, लेकिन उल्टा खराब कर दिया। उनका जन्मना-मरना नहीं मिटाहै। अनंत करोड़ संतों ने पारब्रह्म पद तक की प्राप्ति की, लेकिन केवल पद, आनंद पद की प्राप्ति नहीं कर सके। तीर्थंकरों को पाँचों ज्ञान की प्राप्ति हुई और वे जन्म-मरण से रहित हो गए। महाराज फ़रमाते हैं कि दृढ़ निश्चय करके केवल पद, आनंद पद के ज्ञान को धारण करना ही 'धोवणे लागना' है।"



Mhaare paavna paramguru aaj म्हारे पावणा परमगुरु आज_ हरजस पद राग बधावा (१)

 म्हारे पावणा परमगुरु आज, संया आवो ओ।  म्हारे आया ओ हरि का जन आज, संया आवो ओ ॥ टेर ॥  आवो ओ गावो संया, आणंद बधावा।  म्हारे आंगणिये ओ साधां र...