Friday, August 29, 2025

Piya main bhooli ho, mere Satguru li suljaay पिया मैं भूली हो, मेरे सतगुरु ली सुलजाय_ हरजस पद राग गुंड (३)

 

 पिया मैं भूली हो, मेरे सतगुरु ली सुलजाय, पिया मैं भूली हो।

 भटकी जिण तिण लार, पिया मैं भूली थी। बेह जाती जग मांय, पिया मैं भूली थी ॥ टेर ॥ 

सतगुरु भेव बताईया, प्रभु अन्तर आत्म राम। भेद बिना बहु भटकिया हो, पूज्या बाहर धाम ॥ १॥

 पत्थर बहु विध खो लिया, , प्रभु लिया मुझ ऊठाय। समरथ सतगुरु बायरो प्रभु, सब जग बुहो जाय ॥ २ ॥

 बेद कतेब पारसी प्रभु, पढिये सुनिये जोय। दम तुटे गरह गांठ का, प्रभु मुक्त कहां ते होय ॥ ३ ॥ 

तिरथ कूं बहो भटकियो हो, पावे दुख अपार। जहां जावे जल पाहण है प्रभु, दुजो नहीं विचार ॥ ४ ॥ 

बरत बास उपवासणा प्रभु, आत्म कसे अपार। बांण बिना कबाण कूं, प्रभु क्या कस पाडनहार ॥ ५ ॥

 उलजे कूं सुलजाविया हो, हो, सतगुरु समरथ आय। सुखिया या सांई सांई पाविया हो, अन्तर आतम मांय ॥ ६ ॥

Harjas Pad Raag Gund (3)

Piya main bhooli ho, mere Satguru li suljaay, piya main bhooli ho.

Bhatki jin tin laar, piya main bhooli thi.Beh jaati jag maay, piya main bhooli thi. (Ter)

Satguru bhev bataaiya, Prabhu antar aatm Ram.

Bhed bina bahu bhatkiya ho, poojya baahar dhaam. ॥1॥

Patthar bahu vidh kho liya, Prabhu liya muj uthay.

Samrath Satguru bairo Prabhu, sab jag boho jaay. ॥2॥

Ved kateb paarsi Prabhu, padhiye suniye joy.

Dam tute garh gaanth ka, Prabhu mukt kahaan te hoy. ॥3॥

Tirth koon baho bhatkiyo ho, paave dukh apaar.

Jahan jaave jal paahan hai Prabhu, dujo nahi vichaar. ॥4॥

Bharat baas upvaasna Prabhu, aatm kase apaar.

Baan bina kabaann koon, Prabhu kya kas paadnahar. ॥5॥

Uljhe koon suljaaviya ho, ho, Satguru samrath aay.

Sukhia ya Saai Saai paaviya ho, antar aatm maay. ॥6॥

आत्मा परमात्मा से कह रही है — "मैं आपकी प्राप्ति का रास्ता भूल गई थी, परंतु सतगुरु ने मुझे आपकी प्राप्ति का मार्ग बता दिया, यही सुलझ जाना है।शरीर रूपी आन (शरीर-पूजा) में लगना ही जिण तिण लार भटकना है। जन्म-मरण में आना ही संसार में बहना है।सतगुरु केवली संतो ने यह भेद बताया कि आत्मा में ही परमात्मा है, परंतु सतगुरु के भेद के बिना मैं बहुत भटकी — बाहर के धामों को पूजती रही।

जब-जब आत्मा को मनुष्य शरीर मिला, यह ज्ञान न मिलने से आयु पूर्ण होने पर परमात्मा ने शरीर वापस ले लिया, यही शरीर रूपी पत्थर को अनेक विधि से खोना है।समरथ सतगुरु का केवल ज्ञान धारण किए बिना सारा संसार आवागमन में फंसा है, यही बहना है।वेद, कुरान, बाइबिल को पढ़ो और सुनो — परंतु इन्हें पढ़ने-सुनने में गिनती के श्वास व्यर्थ जाते हैं, परमात्मा की प्राप्ति नहीं होती। यही — “मुक्त कहाँ ते होय?” — का भाव है।मैं बहुत तीर्थों और धामों में भटकी, बहुत कष्ट भोगे, लेकिन जहाँ भी गई, वहाँ पानी और पत्थर के अलावा कुछ भी नहीं था।व्रत, उपवास, तप करके आत्मा को कष्ट देना कमान (धनुष) खींचने जैसा है — परंतु बिना बाण के।सतशब्द का केवल ज्ञान ही बाण है। बिना बाण के कमान खींचने से जैसे निशाना नहीं लगता, वैसे ही इन साधनों से परमात्मा की प्राप्ति नहीं होती।सतगुरु केवली भगवंतों ने अणभै ज्ञान देकर, शरीर-पूजा (आन की उपासना) छुड़ाकर परमात्मा की प्राप्ति के साधन में आत्मा को लगा दिया।

 यही उलझे को सुलझाना है।महाराज फरमाते हैं: "ऐसे ही सच्चे साधन से ही आत्मा में ही परमात्मा की प्राप्ति होती है।"


 आत्मा परमात्मा से कह रही है कि मैं आपकी प्राप्ति का रास्ता भूल गई थी। सतगुरु ने आपकी प्राप्ति का रास्ता बता दिया है, यही सुलजाना है। शरीर रूपी आन की उपासना में लगना ही जिण तिण लार भटकना है। जन्म मरण में आना ही संसार में बहना है। सतगुरु केवली संतो ने भेद बताया कि आत्मा में ही परमात्मा है लेकिन मैं सतगुरु के भेद के बिना बहुत भटकी और बाहर के धामो को पूजती रही। आत्मा को जब जब भी मनुष्य शरीर मिला लेकिन यह ज्ञान नहीं मिलने से आयु पुरी होने पर परमात्मा ने वापस ऊठा लिया, यही शरीर रूपी पत्थर बहु विध खोना है। समरथ सतगुरु का केवल ज्ञान धारण किये बिना सारा संसार आवागमन में आ रहा है यही बहना है। वेद, कुराण, बाईबिल को पढो और सुनो। इनको पढने सुनने से गिनती के श्वांस व्यर्थ जाते है। परमात्मा की प्राप्ति नहीं होती यही मुक्त कहां ते होय है। मैं बहोत तीरथो व धामो में फिरी, बहुत दुख पाई लेकिन जहां भी गई हूं वहां पानी और पत्थर के अलावा कुछ भी नहीं है। व्रत वास उपवास करके आत्मा को कष्ट देते है। यही कबांण की तरह है। सतशब्द का केवल ज्ञान बांण की तरह है। बिना बांण के कबांण खिचने से निशाना नहीं लगता है। ऐसे ही इन साधनो से परमात्मा की प्राप्ति नहीं होती है। सतगुरु केवली भगवंतो ने अणभै ज्ञान देकर शरीर रूपी आन की उपासना

छुडाकर परमात्मा की प्राप्ति के साधन में लगा दिया है, यही उलजे को सुलझाना है। महाराज फरमाते हैं कि ऐसे साधन से ही आत्मा में ही परमात्मा की प्राप्ति हो गई है। 


Mhaare paavna paramguru aaj म्हारे पावणा परमगुरु आज_ हरजस पद राग बधावा (१)

 म्हारे पावणा परमगुरु आज, संया आवो ओ।  म्हारे आया ओ हरि का जन आज, संया आवो ओ ॥ टेर ॥  आवो ओ गावो संया, आणंद बधावा।  म्हारे आंगणिये ओ साधां र...