Friday, August 29, 2025

Piya main dori ho, pragato deen dayal पिया मैं दोरी हो, प्रगटो दीन दयाल_हरजस पद राग गुंड (४)

 Piya main dori ho, pragato deen dayal पिया मैं दोरी हो, प्रगटो दीन दयाल_हरजस पद राग गुंड (४) 

 पिया मैं दोरी हो, प्रगटो दीन दयाल। पिया मैं दोरी हो, ओ दिन दुबर जाय ।। टेर ॥ 

प्रेम लग्यो हर नांव सूं हो, मैं भूली खानर पान। दरस दिज्यो सांईयां, मुझ अन्तर आत्म राम ॥ १ ॥

 रटत रटत थाकी भई हो, ज्यूं बिरहन कलराय। खिन पल जोवू बाटडी, प्रभु अंतर प्रगटो आय ॥ २ ॥ 

तुम बिन सब सुख झूठ है, प्रभु बिरहन नहीं सुहाय। प्राण तजुंगी सांईयां, के दरशण दिज्यो आय ॥ ३ ॥

 बाट निशो दिन देखता, प्रभु दिन दिन निसरया जाय। बिरहन कूं डर उपजे प्रभु, बोहो ओगण मुज मांय ॥ ४॥ 

मेरा ओगण पर हरो प्रभु, तेरा बिडद निभाय। शरणे आया सांईयां, सो तो अजिया कुंपल खाय ॥ ५ ॥

 आज काल के सांईयां हो, भावे मिल जुग मांय। तन मन सुंपयो आप कूं प्रभु, सतगुरु शरणे जाय ॥ ६ ॥ 

तुम मिलिया बिन बाहिरो हो, धक जन्म जग मांय। कंत बिहूणी सेज में प्रभु, रोवत रेण बिताय ॥ ७॥ 

अंतर गत की पीड ने प्रभु, किण सूं कहिये सुणाय । जन सुखदेवजी बिनवे, अब प्रगटो अंतर मांय ॥ ८ ॥

Harjas Pad Raag Gund (4)

Piya main dori ho, pragato deen dayal. Piya main dori ho, o din dubar jaay. (Ter)

Prem lagyo har naam soon ho, main bhooli khaanar paan.

Daras dijyo saaiyaan, mujh antar aatm Ram. ॥1॥

Ratat ratat thaaki bhai ho, jyu birhan kalaray.

Khin pal jovu baatdi, Prabhu antar pragato aay. ॥2॥

Tum bin sab sukh jhoot hai, Prabhu birhan nahi suhaay.

Praan tajungi saaiyaan, ke darshan dijyo aay. ॥3॥

Baat nisho din dekhta, Prabhu din din nisraya jaay.

Birhan koon dar upje Prabhu, boho ogan mujh maay. ॥4॥

Mera ogan par haro Prabhu, tera bidd nibhay.

Sharane aaya saaiyaan, so to ajia kumpal khaay. ॥5॥

Aaj kaal ke saaiyaan ho, bhaave mil jug maay.

Tan man sumpayo aap koon Prabhu, Satguru sharane jaay. ॥6॥

Tum miliya bin baahiro ho, dhak janm jag maay.

Kant bihuni sej mein Prabhu, rovat ren bitay. ॥7॥

Antar gat ki peed ne Prabhu, kin soon kahiye sunay.

Jan Sukhramji binve, ab pragato antar maay. ॥8॥


आत्मा परमात्मा से प्रार्थना कर रही है —"हे परमात्मा! आप मुझे दर्शन दीजिए। आपके दर्शनों के बिना ये दिन दुख में बीत रहे हैं। आपके 

म से ऐसा प्रेम हो गया है कि मैं खाना-पीना भी भूल गई हूं।कृपा करके आत्मा में ही दर्शन दीजिए। भजन करते-करते अब थकान सी हो गई है, इसलिए यह बिरहणी बहुत दुखी हो रही है। हर क्षण, हर पल आपके दर्शनों की बाट देखती हूं।आप मेरे अंतर में प्रकट हो जाइए। आपके दर्शनों के बिना संसार के सब सुख झूठे लगते हैं, मन को अच्छे नहीं लगते। आप दर्शन दीजिए, अन्यथा मैं अपने प्राण त्याग दूंगी।रात-दिन आपकी बाट देखते हुए एक-एक दिन कैसे बीत रहा है, ये तो बस यह बिरहन ही जानती है।अब मन में डर लगने लगा है कि — "शायद मुझमें बहुत अवगुण हैं, इसलिए आप दर्शन नहीं दे रहे हैं।" हे दयालु! मेरे अवगुणों को मत देखो, आप तो अपने बिड़द (दयालु स्वभाव) का विचार करो।भक्षक भी यदि कोई शरण में आ जाए, तो वह रक्षक बन जाता है — जैसे एक बार सिंह की शरण में आई बकरी को सिंह ने हाथी पर चढ़ाकर कुंपले खिलाए थे।वैसे ही आप भी दयालु हैं। मैं आपकी शरण में हूं। मेरे दोषों को मत देखो — बस दर्शन दो।आज मिलो, चाहे कल मिलो, जुगों बाद मिलो — पर मिलो अवश्य। मैंने तो सतगुरु का अणभै ज्ञान धारण करके तन-मन आपको समर्पित कर दिया है।

हे परमात्मा! आपकी प्राप्ति के बिना यह जन्म धिक्कार योग्य है। जैसे पति के बिना पत्नी को सेज का सुख नहीं मिलता और वह रो-रोकर रात बिताती है, वैसे ही मैं भी तड़प रही हूं।अंतर में आपके मिलने की जो पीड़ा है, वो किससे कहूं? कौन सुनेगा?महाराज फरमाते हैं — "आत्मा परमात्मा से प्रार्थना करती है कि — आप मेरे अंतर में सता रूप से प्रकट हो जाइए।"


 आत्मा परमात्मा से प्रार्थना कर रही है कि हे परमात्मा आप दर्शन दो, आपके दर्शनो के बिना यह दिन दुख में जाते है। परमात्मा के नाम से ऐसा प्रेम हो गया है कि मैं खाना पीना भूल गई हूं। आप कृपा करके आत्मा में ही दर्शन देवो। आपके भजन को करते करते थक गई हूं इसलिये यह बिरहनी दुखी हो रही है। क्षण में पल पल आपके दर्शन की बाट देखती हूं। आप मेरे अंतर में दर्शन देवो। आपके दर्शनो के बिना संसार के सब सुख झूठे है मुझे अच्छे नहीं लगते है। आप दर्शन दीजिये अन्यथा में प्राणो को छोडूंगी। रात दिन आपकी बाट देखते देखते एक एक दिन निकल रहे है। इस तरह बिरहन को डर पैदा हो रहा है कि मुझ में बहुत अवगुण है, इसलिये आप दर्शन नहीं दे रहे है। मेरे अवगुणो की तरफ आप मत देखो, आप अपने बिडद का विचार करो। भक्षक के शरण में आने पर भी भक्षक रक्षक हो जाता है जैसे कि सिंह की शरण में आने पर बकरी को भी हाथी पर चढाकर सिंह ने कुंपले खिलाई, ऐसे ही आप तो दयालू है। मैं आपकी शरण में हूं कृपा करके मेरे अवगुणो को न देखकर दर्शन दो। आप आज मिलो चाहे कल मिलो, जुगो में मिलो। मैंने तो सतगुरु का अणभै ज्ञान धारण करके तन मन आपको सौंप दिया है। हे परमात्मा आपकी प्राप्ति के बिना जन्म धिक्कार है। जैसे पति के बिना स्त्री को सेज का सुख प्राप्त नहीं होता है और रो रोकर रात बिताती है। अंतर में आपके मिलने की जो पीडा लग रही है उसे किसे सुणाऊं। महाराज फरमाते हैं कि आत्मा परमात्मा से प्रार्थना करती है कि आप मेरे अन्तर में सता रूप से आकर प्रगटो। 


Mhaare paavna paramguru aaj म्हारे पावणा परमगुरु आज_ हरजस पद राग बधावा (१)

 म्हारे पावणा परमगुरु आज, संया आवो ओ।  म्हारे आया ओ हरि का जन आज, संया आवो ओ ॥ टेर ॥  आवो ओ गावो संया, आणंद बधावा।  म्हारे आंगणिये ओ साधां र...