Friday, August 29, 2025

Va kal to paave nah वा कल तो पावे नहीं_ हरजस पद राग बिलावल (१७)

 Va kal to paave nah वा कल तो पावे नहीं_ हरजस पद राग बिलावल (१७) 

वा कल तो पावे नहीं, ज्यां सुं ममता धापे। जब लग कुल का करम है, चडया रे आपे ।। 

जोगी लागा जोग सूं, भोगी भोगां के तांई। साधू लागा ध्यान सूं, ऋषि ममता मांही ।। १ ।। टेर ।। 

ज्ञानी लागा ज्ञान सुं, श्रोता सुणबा के तांई। आचारी खट करम की, शमसेर संभाही ।। २ ।। 

रेत राज मरजाद कूं, खस्ता दिन जावे। ईश्वर ब्रह्म सुं आद ले, ओकण मोल बिकावे ।। ३ ।। 

सागे सतगुरु पाविया, भरमना सब खोवे। जब ममता सुखराम कह, तिरपत होय सब सोवे ।।४।। 

Harjas Pad Raag Bilawal (17)

Va kal to paave nahi, jyaan soon mamta dhaape. Jab lag kul ka karam hai, chadya re aape.

Jogi laaga jog soon, bhogi bhogan ke taai.

Sadhu laaga dhyaan soon, rishi mamta maahi. ॥1॥ (Ter)

Gyaani laaga gyaan soon, shrota sunba ke taai.

Achaari khat karam ki, shamsher sambhaahi. ॥2॥

Ret raaj marjaad koon, khasta din jaave.

Ishwar Brahm soon aad le, okan mol bikaave. ॥3॥

Saage Satguru paaviya, bharmana sab khove.

Jab mamta Sukhram kah, tirpat hoy sab sove. ॥4॥

"ममता से अलग होने का केवल ज्ञान तो धारण करते नहीं हैं। जब तक तीनों लोकों का साधन करते हैं, तब तक जन्म-मरण नहीं मिटता। जोगी अष्टांग योग की भक्ति करते हैं। भोगी भोग से ही परमात्मा की प्राप्ति करना चाहते हैं। कई साधु ध्यान करने में लगे हुए हैं। ऋषि शिष्यों की ममता में बंधे हुए हैं। ज्ञानी ज्ञान कहकर श्रोताओं को सुना रहे हैं। आचारी, यानी आचार-विचार से शुद्ध रहते हुए, परमात्मा की प्राप्ति मानते हैं। प्रजा राज-काज के नियमों और उनकी मर्यादा के पालन में खस्ती जा रही है। कोई स्वर्ग, बैकुंठ, परब्रह्म तक, तथा जगत में देह अमर भी कर लेते हैं, लेकिन महाप्रलय में सभी आत्माएँ एक जगह आ जाती हैं। यही 'एकण मोल बिकावे' है।महाराज फ़रमाते हैं जब ओधाधारी सतगुरु मिलते हैं, तब उनके ज्ञान द्वारा सभी भ्रमों का नाश होता है। जब आत्मा की ममता समाप्त होती है, तब केवल पद में पहुँचना ही 'तिरपत होना' है।"


Mhaare paavna paramguru aaj म्हारे पावणा परमगुरु आज_ हरजस पद राग बधावा (१)

 म्हारे पावणा परमगुरु आज, संया आवो ओ।  म्हारे आया ओ हरि का जन आज, संया आवो ओ ॥ टेर ॥  आवो ओ गावो संया, आणंद बधावा।  म्हारे आंगणिये ओ साधां र...