Thursday, November 20, 2025

Kaljug pūran joy कलजुग पूरण जोय_ हरजस पद राग मंगल (१७) कलजुग पूरण जोय, सुणो जब आवसी। भांभी हनण कूं दुज, ब्याव परण घर लावसी ।। १ ।। तीरथ सेवा धाम, सबे मिट जावसी। जात वरण कुल नांय, बिसे मध खावसी ।। २ ।। बेटी मते वर सोज के, लग्न लिखावसी। नरप भिक्षा लाट, खजाने लावसी ।। ३ ।। पतिव्रता की जोड, डोरी जुग गावसी। मंतर मूंठा सीख, पंडित नर कवावसी ।। ४ ।। तां दिन कलयुग, पूर कला सो धारसी। तां दिन साहा डंड, सांच खोडे में मारसी ।। ५ ।। घोडी गधी को दूध, सांडया को होवसी। सूरी कुती जग दूय के, जगत बिलोवसी ।। ६ ।। सामा मिल्यां राम, कोई नहीं भाखसी। एक निमख ईतबार, कोई नहीं राखसी ।। ७ ।। वेद प्राण विचार, भक्त सो थाकसी। हर बिन कथनी जोड, जक्त में भाखसी ।। ८ ।। भक्ति करता जोय, हेरो दे पकडसी। औरत सुण भरतार, गवाडा झगडसी ।। ९ ।। पांच बरस की के बाल, गंगा छुप जावसी। जब कलयुग सुण, हलाहल आवसी ।। १० ।। मानुष गज सम व्हेत, पाखण्ड बोह चालसी। शुभ बातां सब सेंग, असल सो पालसी ।। ११ ।। एक एक ऋषि कूं घेर, बहुत बिद मारसी। कह सुखदेव अवतार, तके दिन धारसी ।। १२ ।। Harjas Pad Raag Mangal (17) Kaljug pūran joy, suṇo jab āvasī. Bhāṁbhī hanaṇ kūṁ duj, byāv paraṇ ghar lāvasī. ॥ 1 ॥ Tīrath sevā dhām, sabe miṭ jāvasī. Jāt varaṇ kul nāyṁ, bise madh khāvasī. ॥ 2 ॥ Beṭī mate var soj ke, lagna likhāvasī. Narap bhikṣā lāṭ, khajāne lāvasī. ॥ 3 ॥ Pativratā kī joṛ, ḍorī jug gāvasī. Mantar mūṁṭhā sīkh, paṇḍit nar kavāvasī. ॥ 4 ॥ Tāṁ din Kalyug, pūr kalā so dhārasī. Tāṁ din sāhā ḍaṇḍ, sāñc khoṛe meṁ mārasī. ॥ 5 ॥ Ghoṛī gadhī ko dūdh, sāṁḍayā ko hovasi. Sūrī kutī jag dūy ke, jagat bilovasi. ॥ 6 ॥ Sāmā milyāṁ Rām, koī nahīṁ bhākhasī. Ek nimakh ītbar, koī nahīṁ rākhasī. ॥ 7 ॥ Ved prāṇ vicār, bhakt so thākhasī. Har bin kathnī joṛ, jakt meṁ bhākhasī. ॥ 8 ॥ Bhakti kartā joy, hero de pakaṛasī. Aurat suṇ bharatār, gavāḍā jhagaḍasī. ॥ 9 ॥ Pāṁch baras kī ke bāl, Gangā chup jāvasī. Jab Kalyug suṇ, halāhal āvasī. ॥ 10 ॥ Mānuṣ gaj sam whet, pākhaṇḍ boh chālasī. Shubh bātāṁ sab seṅg, asal so pālasī. ॥ 11 ॥ Ek ek ṛṣi kūṁ gher, bahut bid mārasī. Kah Sukhdev avtār, take din dhārasī. ॥ 12 ॥ "कलयुग पूर्ण आ जाएगा, जब ब्राह्मण भांभी की लड़की से विवाह करके घर लाएगा। तीर्थ, परमात्मा की सेवा और धाम नहीं रहेंगे, जाति, वर्ण, कुल कुछ नहीं रहेंगे। सब विषयों में लगेंगे। लड़की अपने वर को खुद ढूंढकर शादी कर लेगी। राजा भिखारियों से कर लेकर खजाने में जमा करेगा। पतिव्रता की महिमा गाएंगे, मैले - मंत्र और मूंठ सीख -सीखकर पंडित कहलाएंगे। उन्हीं दिनों कलयुग पूर्ण कला धारण करेगा। सब साहूकारों को बिना दोष दंड देंगे, यही सच 'खोड़े में मारना' है। घोड़ी, गधी और ऊंटनी का दूध काम में लेंगे, सुअरनी और कुतिया का दूध बिलोएंगे। सामने मिलने पर कोई राम-राम नहीं करेगा। एक क्षण भी कोई किसी पर भरोसा नहीं करेगा। वेद-पुराण का विचार करना, और भक्ति कोई नहीं करेगा। रामजी के बिना खराब कविता जोड़-जोड़कर कहेंगे। परमात्मा की भक्ति करने वाले को ढूंढकर पकड़ेंगे और स्त्री-पुरुष आपस में झगड़ेंगे। पांच वर्ष की उम्र में ही संतान होने लग जाएगी और गंगा लुप्त हो जाएगी। जब कलयुग हलाहल आएगा। मनुष्य का कद बहुत छोटा हो जाएगा। अनेक तरह के पाखंड चलेंगे। अच्छी बात करेंगे तो सब उनको मना करेंगे। एक-एक ऋषि को घेरकर बहुत मारेंगे। महाराज फरमाते हैं कि उस दिन अवतार प्रकट होगा।"

Mhaare paavna paramguru aaj म्हारे पावणा परमगुरु आज_ हरजस पद राग बधावा (१)

 म्हारे पावणा परमगुरु आज, संया आवो ओ।  म्हारे आया ओ हरि का जन आज, संया आवो ओ ॥ टेर ॥  आवो ओ गावो संया, आणंद बधावा।  म्हारे आंगणिये ओ साधां र...