Friday, November 21, 2025

Kon shabd se kon hoy कोण शब्द से कोण होय_ हरजस पद राग बसन्त (८) 

 कोण शब्द से कोण होय, जन सोच सोध कहो अरथ मोय ॥ टेर।
 बावन हरफ सब सोज बीर, कौन शब्द को कोण चीर।
 तत पांच गुण तीन जांण, सतशब्द मूल मुज ज कहो आंण ॥ १ ॥ 
 हो ररंकार में बडो कोण, सुण ओऊं सोऊं कहो मोण।
 या च्यार शब्द को करो न्याव, कोण शब्द सो कोण आय ॥ २ ॥
 पांच तत्त गुण तीन जांण, ईण ओऊं शब्द से बणया आंण।
 सुण सोऊं शब्द का हरफ सेंग, जे जीभ पढत मुख करे बेग ॥ ३ ॥ 
 च्यार हरफ को मूल एक, यो शीश शब्द सोई इधक देख। 
कह सुखदेव कहे सो सोध जोय, सुण सतशब्द सो अधिक होय ॥ ४ ॥ 

 Harjas Pad Raag Basant (8)
 Kon shabd se kon hoy, jan soch sodh kaho arth moy. ॥ Ter ॥ 
Bawan harf sab soj beer, kaun shabd ko kon cheer. 
 Tatt paanch gun teen jaan, satshabd mool muj j kaho aan. ॥ 1 ॥
 Ho rarkaar mein bado kon, sun oon soon kaho mon. 
 Ya chaar shabd ko karo nyaav, kon shabd so kon aay. ॥ 2 ॥ 
Paanch tatt gun teen jaan, in oon shabd se banaya aan. 
 Sun soon shabd ka harf seng, je jeebh padat mukh kare beg. ॥ 3 ॥
 Chaar harf ko mool ek, yo sheesh shabd soi idhak dekh.
 Kah Sukhram kahe so sodh joy, sun satshabd so adhik hoy. ॥ 4 ॥ 

भक्ति करने वालों से महाराज कहते हैं — "जिस शब्द से जो कुछ भी होता है, उसे सोच-समझकर कहो, केवल रटने से कुछ नहीं होता। बावन (५२) हरफों को पहचानो, और समझो कि कौन-सा शब्द कितनी दूर तक पहुँच रखता है।पाँच तत्व और तीन गुणों को जानो — और यह भी बताओ कि सतशब्द का मूल क्या है? ररंकार में बड़ा कौन है? ओऊं और सोऊं का स्थान क्या है?इन चारों शब्दों (ररंकार, ओऊं, सोऊं, सतशब्द) का खुलासा (विवेचन) करो — कि कौन-सा शब्द किस स्तर तक कार्य करता है, और कहां तक ले जा सकता है। महाराज आगे कहते हैं:पाँच तत्व और तीन गुण — ये सब आत्मा और ब्रह्म से बने हैं।"सोऊं" शब्द का अर्थ है — स्वाँस। इसी स्वाँस से ही सब अक्षर (हरफ) बनते हैं, जिन्हें जीभ से बोला जाता है।इन सभी चारों शब्दों का मूल आधार है — "ओक", अर्थात स्वाँस।लेकिन इन सबसे ऊपर और श्रेष्ठ जो है, वह है सतशब्द।निष्कर्ष:महाराज कहते हैं — "सतशब्द" इन सभी शब्दों से अधिक महान है। तुम स्वयं इसका अनुभव करके देखो, तभी इसकी सत्यता और गहराई समझ में आएगी।

Mhaare paavna paramguru aaj म्हारे पावणा परमगुरु आज_ हरजस पद राग बधावा (१)

 म्हारे पावणा परमगुरु आज, संया आवो ओ।  म्हारे आया ओ हरि का जन आज, संया आवो ओ ॥ टेर ॥  आवो ओ गावो संया, आणंद बधावा।  म्हारे आंगणिये ओ साधां र...