Friday, November 21, 2025

Nahin ho in naam sam नहीं हो इण नांव सम_ हरजस पद राग बसन्त (१)

 नहीं हो इण नांव सम, बिना गुरु भेद न तोभी पावे गम ॥ टेर ॥ 
 बन मध जाय कर धरत ध्यान, छोडे जगत गोत कुल सरब आंण। 
आसण साज अनेका खुद, नव द्वार रखे सर्वं मूंद ॥ १ ॥ 
 करव्रत झाप देह कमला चाड, पर्वत बिचे गुफा तन बाड।
 कठण तप देह अंग गाल, फोडे भरम भ्रांत सो अज्ञान पाल ॥ २॥ 
 पढे चहूं वेद सो पंडित होय, सरोधा साझ अगम कहे कोय।
 कर ले मांड बिणासे आय, जो सुणई शकल ऊर मांय ॥ ३ ॥
 जप तप करे अनेका कोय, पुन्न घर दया अलेखे होय। 
कह सुखराम कहा कहूं जोड़, बिना हरि नांव नहीं कहूं ठोड ॥ ४ ॥
 Harjas Pad Raag Basant (1)
 Nahin ho in naam sam, bina guru bhed na tobhi paave gam. ॥ Ter ॥
 Ban madh jaay kar dharat dhyaan, chhode jagat got kul sarb aan.
 Aasan saaj aneka khud, nav dwaar rakhe sarvam moond. ॥ 1 ॥
 Karavrat jhaap deh kamla chad, parvat biche gufa tan baad.
 Kathhan tap deh ang gaal, phode bharam bhraant so agyaan paal. ॥ 2 ॥
 Padhe chahu ved so pandit hoy, sarodha saajh agam kahe koy.
 Kar le maand binaase aay, jo sunai shakal oor maay. ॥ 3 ॥ 
Jap tap kare aneka koy, punn ghar daya alekhe hoy.
 Kah Sukhram kaha kahun jod, bina Hari naam nahin kahun thod. ॥ 4 ॥

 निज नाम के बिना मोक्ष नहीं
 कोई भी साधन, परमात्मा के निज नाम के बराबर नहीं हो सकता। 
बिना सतगुरु द्वारा दिए गए अणभै ज्ञान के, इस सच्चे नाम की पहचान नहीं हो सकती।
इस संसार में अनेक लोग अपने गोत्र, कुल, परिवार को त्यागकर वनों में चले जाते हैं और वहां ध्यान करते हैं।
विभिन्न प्रकार के आसन लगाते हैं, नौ द्वारों को (इन्द्रियों को) बंद कर लेते हैं। 
कोई यह व्रत लेता है कि मैं नींद नहीं लूंगा, कोई अपने शरीर को काटकर उसे अपने ईष्ट को अर्पण कर देता है।कठिन तपस्या करके अपने शरीर को सुखा डालते हैं, कुछ पर्वतों की गुफाओं में निवास करते हैं।
कोई अपनी भ्रम-भ्रांति और अज्ञानता को छोड़ देता है, चारों वेदों को पढ़कर पंडित कहलाने लगता है।
कोई सरोधा साधता है (ज्योतिष विद्या) और भविष्यवाणी करने लगता है, कुछ लोग संसार को बनाने और बिगाड़ने का दावा करने लगते हैं। 
कोई ऐसा होता है जो एक बार सुनकर ही हृदय में सब कुछ धारण कर लेता है।
कोई जप-तप, व्रत-उपवास, और घर-घर में पुण्य, धर्म, दया और अक्षय फल की बात करता है।
महाराज फरमाते हैं — संसार में अनेक साधन हैं, उनकी गिनती संभव नहीं, लेकिन यदि उनमें परमात्मा का निज नाम न हो, तो मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती।
ऐसे जीव चौरासी लाख योनियों में घूमते रहते हैं, और सच्चा उद्धार उन्हें कभी नहीं होता।
 

Mhaare paavna paramguru aaj म्हारे पावणा परमगुरु आज_ हरजस पद राग बधावा (१)

 म्हारे पावणा परमगुरु आज, संया आवो ओ।  म्हारे आया ओ हरि का जन आज, संया आवो ओ ॥ टेर ॥  आवो ओ गावो संया, आणंद बधावा।  म्हारे आंगणिये ओ साधां र...